योग से खुद को हमेशा स्वस्थ और ऊर्जावान रखिए: कुसुम शेढ़ा
June 21, 2025
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प्राणायाम हमारे शरीर को साफ ही नहीं स्वस्थ भी रखता है प्राणायाम शवांस-प्रश्वास के व्यायाम की एक पद्धति है जिससे फेफड़े बलिष्ठ होते हैं Jagrat Times, Kanpur/ अंतर्राष्ट्रीय
प्राणायाम हमारे शरीर को साफ ही नहीं स्वस्थ भी रखता है
प्राणायाम शवांस-प्रश्वास के व्यायाम की एक पद्धति है जिससे फेफड़े बलिष्ठ होते हैं
Jagrat Times, Kanpur/ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून पर दिल्ली की सीनियर स्टार एथलीट कुसुम शेढ़ा ने योग पर अपने अनुभव विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि अगर आपको हमेशा स्वस्थ और ऊर्जावान रहना है तो नियमित रूप से योग जरूर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज का प्रगतिशील मानव भौतिक उपलबियाँ प्राप्त करता चाहता है परन्तु यह प्रगति वह तभी कर सकता है जन उसके पास प्रयप्त शक्ति हो । हर स्तर पर चाहे वह व्यापारी हो, सेवा करने वाला या बुद्धिजीवी हो। क्या एक कच्चे घड़े मे जल भरा जा सकता नहीं ना। अतः हम उसे पका कर ही इस्तेमाल करते हैं। इसी प्रकार यह शरीर भी व्यायाम, योग, प्राणायाम से ही परिपक्व हो सकता है। जिस प्रकार हम अपने घर, दफ्तर, शरीर की सफाई करते हैं उसी तरह हमें शरीर अंदर की सफाई की जरूरत होती है। प्राणायाम हमारे शरीर को साफ ही नहीं स्वस्थ भी रखता है। आप यह मानते ही होंगे की मन बहुत चंचल होता है तो इसको संयम में लाने के लिए हमें प्राणायाम एवं ध्यान को अपनाना चाहिए। अगर आप स्वस्थ हैं तभी चार लोगों की मदद कर सकते हैं। इसको मै अपनी भाषा में लोगों को बोलती हूँ कि पहले अपने आप से प्यार करना सीखो अर्थात स्वरथ रहो ।
आठ भागों में बंटा है योग
यम – अहिंसा, सत्य, ब्रम्हचर्य, अस्तेय, अपरिग्रह..
नियम – शोच आदि से निर्वित होना, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर की पूजा ।
आसन – स्थिर होकर सुख पूर्वक बैठकर नाना प्रकार के योग करना ।
प्राणायाम श्वास- [-प्रश्वास के व्यायाम की पद्धति ।
प्रत्याहार – पांच तत्वों (अग्नि, वायु, जल, पृथवी आकाश) को पांच इंद्रियों (चक्ष, श्रोत्र, जिष्हा, नासिका त्वचा) द्वारा पांच विषयों (दृश्य, शब्द, गंध, रस, स्र्श) ग्रहण करना ही प्रत्याहार कहलाता है।
धारणा – चित्त को किसी एक विचार में बांधने की क्रिया है ।
ध्यान – मन को निर्विचार करना। मन पर लागू I ध्यान की उच्च अवस्था को समाधि कहते हैं। मै यहां प्राणायाम के विषय मे ज्यादा ‘बताना चाहती हूं क्योंकि ज्यादातर लोग समय की कमी बताते हैं किन्तु मेरा यह मानना है कि सब कुछ अपनी सोच से ही चलता है आपने एक बार ठान लिया कि यह करना अवश्यक है तभी कर पायेंगें कुछ भी असम्भव नही हैं।
प्राणायाम शवांस-प्रश्वास के व्यायाम की एक पद्धति है जिससे फेफड़े बलिष्ठ होते हैं रक्त संचार में सुधार आता है। अधिकांश व्यक्ति गहरा श्वास नहीं लेते। जिससे फेफड़ं का लगभग एक चौथाई भाग ही कार्य करता है। हमारे फेफड़ों में शहद की मक्खी के छतों की तरह सात करोड तीस लाख “स्पंत्र” जैसे कोष्ठक होते हैं। साधारण हल्का शवास लेने पर उनमें से लगभग दो करोड छिद्रों में ही वायु संचार होता है। शवास का महत्व जानने के लिए निम्नलिखित तालिका से ही आप जान पायेंगे की जितने कम और गहरे श्वास लेंगे उतनी उम्र को लम्बा कर सकते हैं।
1 मिनट आयु कछुवा 4-5 बार 200 साल सर्प 7-8 150 साल मनुष्य 15-16 बार 100 साल घोड़ा 20-22 बार 40 साल कुता 28-30 बार 14 साल प्राणायाम के कृछ नियम
शुद्ध वायु मे 2 सिद्धासन व्रजासन या सुखासन मै
नाक से शवांस ले बंद है तो पहले खोले।
भोजन के 4 या 5 घन्टे बाद या सुवह खाली पेट। 5 से 10 मिनट तक पहल करें फिर आधा घन्टे तक बढा सकते हैं।
पेट साफ रखें (रात को सोते समय त्रिफला अधा चम्मच दूध के साथ लें)
जिस व्यकित का आहार विहार ठीक नहीं है जिस व्यक्ति की सांसारिक कार्य करने की निश्चत दिनचर्यां नहीं है और जिस व्यक्ति की सोने-जागने की दिनचर्या भी निश्चित नहीं है, ऐसा व्यक्ति योग करने का दम्म करता है तो उसे योग का कोई लाभ नहीं मिल सकता। वह योग करके भी दुखी रहता है।
प्राणायाम 10 प्रकार के होते है पर में यंहा 3 प्रकार का ही जिक्र करूंगी-
मस्त्रिका-श्वास को पूरा अन्दर डायाफ्राम तक भरना व बाहर भी पूरी शक्ति से छोड़ना । मन्द गति, मध्यम गति, तीव्र गति। शरीर की स्वस्थता के अनुसार। गमीयों में अल्प मात्रा में करें।| वैसे 3-5 मिनट की अवधि। लाभ-सर्दी, जुकाम, एल्जी, दमा, साईनस, थायराइड, टान्सिल । शरीर के विषाक्त द्रव्यों का निष्कासन I
कपाल भाति-ये किसी जानकार से सीखें। श्वास को बाहर छोडते रहे और पेट को अन्दर श्वास छोड़ते हुए। 5-6 मिनट शुरूआत में और बाद में 15-20 मिनट तक कर सकते हैं। लाभ-मुख मण्डल पर ओज, तेज, आभा। कफ, दमा. हृदय ब्लोकेज, फेफडे एवं मसितष्क के रोग, कब्ज, शुगर और पेट से सम्बन्धित सभी बिमारियाँ।
नाड़ी शोधन बाई नासिका से लम्बा श्वास लें दाई नासिका को बंद करके। दोनो नासिकाओंको बंद करे कुछ समय के लिए 4-5 सेंकण्ड रोके और फिर दाई नासिका से लम्बी अवधि से श्वास निकालें। फिर दाईं नासिका से श्वास लें और रोके फिर बाईं नसिका से श्वास लम्बी अवधि से निकालें इसको एक चक कहते हैं। यह वैसे अनुलोम विलोम की तरह होता है पर इसमे रोकने की प्रक्रिया से नाड़ी शोधन नाम दिया गया है।