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गोवा: एक ट्रिप जो सैर से ज़्यादा, परिवार के नाम रही : डॉ. रोशनी टाक

  • May 26, 2026
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अंकुर सिंघम केडिया और सान्वी केडिया—के साथ 12 दिनों के लिए गोवा Jagrat Times, Kanpur/ आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, समय की सबसे बड़ी कमी अगर किसी

गोवा: एक ट्रिप जो सैर से ज़्यादा, परिवार के नाम रही : डॉ. रोशनी टाक

अंकुर सिंघम केडिया और सान्वी केडिया—के साथ 12 दिनों के लिए गोवा

Jagrat Times, Kanpur/ आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, समय की सबसे बड़ी कमी अगर किसी चीज़ की है, तो वह है परिवार के साथ सुकून भरा समय। हम सभी अपने-अपने कामों और जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि एक ही घर में रहते हुए भी, साथ होने का एहसास कहीं पीछे छूट जाता है। ऐसे में कभी-कभी ज़रूरी हो जाता है कि हम अपने रूटीन से बाहर निकलकर, सिर्फ अपने अपनों के लिए समय निकालें।
इसी सोच के साथ, मैं हाल ही में अपने दोनों बच्चों—अंकुर सिंघम केडिया और सान्वी केडिया—के साथ 12 दिनों के लिए गोवा गई। इस यात्रा का उद्देश्य केवल घूमना-फिरना नहीं, बल्कि रिलैक्स करना, एक-दूसरे के साथ समय बिताना और जीवन की सरल खुशियों को महसूस करना था। बेटी सान्वी के जन्मदिन को स्पेशल बनाने के लिए हम लोगों ने कुछ नया करने के उद्देश्य से गोवा जाने का प्लान बनाया।

सादगी में भी खूबसूरती

यह यात्रा किसी लक्ज़री प्लान का हिस्सा नहीं थी, बल्कि एक मिडिल क्लास, इकोनॉमिक ट्रिप थी, जो अपने आप में बेहद संतोषजनक रही। जयपुर से मुंबई तक ट्रेन और फिर मुंबई से गोवा तक फ्लाइट का सफर तय किया गया।
नॉर्थ गोवा के मॉरजिम क्षेत्र में एक Airbnb में ठहरकर, हमने अपने दिन बहुत सादगी से बिताए। प्योर वेजिटेरियन होने के कारण, हमने ज़्यादातर खाना खुद ही बनाया—जिसमें anchor संयम और सान्वी का उत्साह भी देखने लायक था। परिवार के साथ मिलकर खाना बनाने के ये छोटे-छोटे पल, इस यात्रा की सबसे बड़ी याद बन गए।

बीचेस की खूबसूरती और सुकून के पल

इस यात्रा में हमने अधिक भागदौड़ से बचते हुए, केवल आसपास के स्थानों को ही एक्सप्लोर किया। मॉरजिम, टर्टल बीच, वागेटोर, अंजुना और चापोरा फोर्ट जैसे स्थानों ने मन को बेहद सुकून दिया।
इनमें से वागेटोर बीच की सुंदरता ने विशेष रूप से प्रभावित किया—ऊँची चट्टानों से दिखता समुद्र का दृश्य, डूबता सूरज और शांति का एहसास, इसे यादगार बना गया।
एक दिन साउथ गोवा की ओर भी रुख किया, जहाँ की शांति, साफ-सुथरे sea shell बीच और पुराने चर्चों की आध्यात्मिकता ने यात्रा को एक अलग ही आयाम दिया।

लोकल अनुभव और आज़ादी का एहसास

गोवा में घूमने के लिए हमने एक एक्टिवा किराए पर ली, जिससे न केवल यात्रा आसान हुई, बल्कि हर मोड़ पर रुककर नज़ारों को महसूस करने की आज़ादी भी मिली।
बाकी समय हमने बिना किसी तय योजना के बिताया—कभी समुद्र किनारे बैठकर बातें करना, कभी साथ में हँसना, और कभी बस खामोशी को जीना। इन पलों में, बच्चों के साथ एक अलग ही जुड़ाव महसूस हुआ—जो रोज़मर्रा की भागदौड़ में अक्सर छूट जाता है।

जिम्मेदारी भी उतनी ही ज़रूरी

आज जब हम खूबसूरत जगहों की तलाश में दूर-दूर तक जाते हैं, तो यह हमारी जिम्मेदारी भी बनती है कि हम उन स्थानों की स्वच्छता और सुंदरता बनाए रखें। क्योंकि प्रकृति हमें जितना देती है, उतना ही उसे संभालना भी हमारा कर्तव्य है।

साथ बिताया समय ही असली संपत्ति है

यह यात्रा हमें यह सिखाकर लौटी कि असली खुशी किसी महंगे रिसॉर्ट या व्यस्त टूर प्लान में नहीं, बल्कि अपने प्रियजनों के साथ बिताए गए सरल और सच्चे पलों में होती है।
कभी-कभी, जिंदगी को समझने के लिए कहीं दूर जाने की नहीं,बस एक-दूसरे के करीब आने की जरूरत होती है।

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