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सुप्रसिद्ध कवयित्री, रेडियो- टीवी एंकर व चिंतक अनुपमा अनुश्री की कलम से…

  • December 16, 2025
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Jagrat Times, Kanpur/ कैसा ये दौर ए दस्तूर…. अपने लिए कोईगाइडलाइन तय की नहीं !कोई आदर्श फॉलो किया नहींजीवन मूल्यों को न समझान अपनायाशिक्षक , उपदेशक बन गए!!कोई

सुप्रसिद्ध कवयित्री, रेडियो- टीवी एंकर व चिंतक अनुपमा अनुश्री की कलम से…

Jagrat Times, Kanpur/ कैसा ये दौर ए दस्तूर….

अपने लिए कोई
गाइडलाइन तय की नहीं !
कोई आदर्श फॉलो किया नहीं
जीवन मूल्यों को न समझा
न अपनाया
शिक्षक , उपदेशक बन गए!!
कोई संघर्ष शामिल हुआ नहीं
जीवन को अनुभव किया नहीं!
बस एक ही चीज सीख ली
पैसा कमाने की दौड़,
दिखावा ,आडंबर, बनावट ,
होड़, नकलीपन,
बकबक और शोर!
देख- देख के ये दौर ,
हो जाते हैं बोझिल और बोर
बिना अनुभव, यह कैसी बकबक!
बिना तपे, ये कैसा सोना!
बिना सत्य, ये कैसी चमक!
बिना तराशे,यह कैसा कोहिनूर !
बिना मेहनत, कैसा धन!
बिना परहित, ये कैसा जीवन!
बोलचाल में मर्यादा, विनम्रता ,सभ्यता बिना
यह कैसी समझाइश!
दूसरों से अच्छे व्यवहार की
फिर कैसी फरमाइश!
बिना श्रेष्ठ विचार, संस्कार ,
अच्छे कर्म और व्यवहार
ये कैसी स्टाइल!!
बेईमानी, झूठ , फैशन,
फरेब है करीब
अपनों और अच्छे गुणों
से हैं गरीब!
यह कैसी लहर है!
भटकाव , बिखराव में
डूबा अपना ही घर है!
फेक जीवन को कहीं फेंक दो !
असलियत अपनाकर
खरा सोना बनो।
झूठी बातों में व्यर्थ न इतराओ
ब्रह्मांड में सच्चाई, ईमानदारी ,
प्रेम ,परोपकार की
वाइब फैलाओ।
भारत के इतने समृद्ध ज्ञान,
संस्कृति,भाषा, मर्यादा को
तोड़ -मरोड़ कर
झूठी स्टाइल और
धुएंँ में मत उड़ाओ
अभी भी वक्त है सुधर जाओ।
जीवन को सही दिशा देने के लिए,
हमारे समृद्ध शास्त्र
और वांग्मय पढ़ो
सद्ज्ञान रूपी मोती चुनो
हर किसी की बातों , प्रवचन,
झूठ उपचार,दिखावे मे पडकर
धोखा मत खाओ।
कि कर्मों की गति बड़ी है।
नीयत सही हो तो
नियति भी साथ देती है।

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