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‘संभव’ अभियान बन रहा यूपी की पोषण क्रांति का आधार

  • July 17, 2025
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Jagrat Times, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक शिशु के पहले छह वर्ष और एक मां की गर्भावस्था अब सिर्फ पारिवारिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सरकारी संकल्प का हिस्सा बन

‘संभव’ अभियान बन रहा यूपी की पोषण क्रांति का आधार

  • माताओं और नवजातों की सेहत पर योगी सरकार की नजर, तीन माह की थीम आधारित योजना से मिल रहा लाभ
  • ‘छह माह, सात बार’ यूपी में शिशु पोषण की निगरानी के लिए बनी अनोखी रणनीति
  • रीयल टाइम मॉनिटरिंग से बदल रही तस्वीर, आंगनबाड़ी की महिलाएं बनीं पोषण अभियान की नायक
  • योगी सरकार के समर्पित प्रयासों से मातृ-शिशु पोषण में आ रहा गुणात्मक सुधार

Jagrat Times, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक शिशु के पहले छह वर्ष और एक मां की गर्भावस्था अब सिर्फ पारिवारिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सरकारी संकल्प का हिस्सा बन चुकी है। प्रदेश में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के स्वास्थ्य और पोषण को लेकर एक परिवर्तनकारी प्रयास संभव अभियान 5.0 जारी है। यह सिर्फ सरकारी आंकड़ों तक सीमित कोई पहल नहीं, बल्कि समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग के जीवन को बेहतर बनाने की जमीनी कोशिश है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने मातृत्व और बाल पोषण के क्षेत्र में एक सशक्त, समन्वित और चरणबद्ध कार्ययोजना लागू की है, जिसका उद्देश्य है, कोई भी मां व बच्चा कुपोषित न रहे।

मातृ-शिशु पोषण को मिल रहा नया आयाम
संभव अभियान 5.0 के अंतर्गत तीन महीनों (जुलाई-सितंबर) को विशेष रूप से थीम आधारित गतिविधियों से जोड़ा गया है। जुलाई में मातृ पोषण पर केंद्रित गतिविधियां सुनिश्चित की जा रही हैं, ताकि गर्भवती और धात्री माताओं को पोषणयुक्त आहार, आयरन-फोलिक एसिड और स्वास्थ्य जांच जैसी सुविधाएं समय पर मिलें। अगस्त में 0-6 माह के नवजात शिशुओं की निगरानी, स्तनपान जागरूकता और समुचित पालन का अभ्यास केंद्र में रहेगा है। वहीं, सितंबर को ऊपरी आहार एवं पोषण माह के रूप में मनाया जाएगा है, जिसमें शिशुओं को ऊपरी आहार शुरू करने के सही समय और तरीके पर माता-पिता को प्रशिक्षित किया जाएगा।

‘छह माह, सात बार’ की रणनीति
संभव अभियान की प्रमुख रणनीति “छह माह, सात बार” है, जिसमें 0 से 6 माह तक के शिशु को सात निर्धारित समयांतराल पर पोषण एवं स्वास्थ्य की जांच के अंतर्गत लाया जाता है। इस रणनीति से गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की समय रहते पहचान की जा रही है और उन्हें शीघ्र पोषण पुनर्वास केंद्रों या समुदाय आधारित इलाज में भेजा जा रहा है। इसके अंतर्गत बीते 15 जुलाई को संभव अभियान के तहत प्रदेश में भर में पहली बार स्टंटिंग यानि बच्चों में नाटेपन के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान चलाया गया जहां सभी 75 जिलों में प्रत्येक जिला 100 ऐसे आंगनबांड़ी केंद्र चिन्हित किए गए जहां सबसे अधिक स्टंटिंग के मामले दर्ज किए गए।

नाटेपन की पहचान के लिए 0 से 5 वर्ष तक की आयु के बच्चों की जांच की जा रही है जिसमें उनके कुपोषण और विकास संबंधित समस्याओं की पहचान और निगरानी के लिए एक वृहद अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत अब तक 980254 बच्चों की शारीरिक माप और स्थिति का आंकलन किया जा चुका है। यह कार्य राज्य के 75 जिलों के 7500 चयनित आंगनबाड़ी केंद्रों पर किया गया। इस अभियान को और अधिक प्रभावी तथा पारदर्शी बनाने के लिए हर एक आंगनबाड़ी केंद्र पर एक-एक नोडल अधिकारी की तैनाती की गई है। यानी, 7500 आंगनबाड़ी केंद्रों पर कुल 7500 नोडल अधिकारियों को नामित किया गया है। ये अधिकारी न केवल बच्चों की माप प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं, बल्कि ज़रूरतमंद बच्चों की पहचान करके उन्हें स्वास्थ्य सेवाएं, पुष्टाहार और चिकित्सकीय देखभाल दिलवाने में भी मदद कर रहे हैं।

तकनीक और टीमवर्क की ताकत से मिल रही सफलता
संभव अभियान का सबसे प्रभावशाली पक्ष इसका रीयल टाइम डाटा कैप्चरिंग सिस्टम है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मोबाइल ऐप के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और बच्चों की नियमित मॉनिटरिंग करती हैं। यह प्रणाली स्वास्थ्य विभाग और महिला कल्याण विभाग के बीच सशक्त समन्वय सुनिश्चित करती है। गांव से लेकर ब्लॉक और जिला स्तर तक की निगरानी व्यवस्था मजबूत की गई है। न्यूट्रिशन मिशन रूम जैसे अभिनव उपायों से हर स्तर पर डाटा का विश्लेषण कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। 60 हजार महिला स्वंय सहायता समूहों के माध्यम से प्रदेश में पुष्टाहार का वितरण किया जा रहा है। इसके अलावा, पोषण पखवाड़े, सामुदायिक बैठकें और मातृ समिति जैसी संरचनाएं जन-सहभागिता को मजबूत कर रही हैं।

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