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पंडित चन्द्रकान्त शुक्ला से जानिए! चातुर्मास में क्या न करे गलतियां, इन विशेष बातों का रखे ध्यान

  • July 6, 2025
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पंडित चन्द्रकान्त शुक्ला Jagrat Times, Kanpur/ चातुर्मास क्या है? ‘चातुर्मास’ संस्कृत का शब्द है जिसका अर्थ है – चार मासों का समूह। यह आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी)

पंडित चन्द्रकान्त शुक्ला से जानिए! चातुर्मास में क्या न करे गलतियां, इन विशेष बातों का रखे ध्यान

पंडित चन्द्रकान्त शुक्ला

Jagrat Times, Kanpur/

चातुर्मास क्या है?

‘चातुर्मास’ संस्कृत का शब्द है जिसका अर्थ है – चार मासों का समूह। यह आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी) तक चलता है। इन चार महीनों में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवकार्य स्थगित हो जाता है।

यह काल मुख्यतः आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और आश्विन – इन चार मासों को सम्मिलित करता है।

चातुर्मास 2025 में कब है?

प्रारंभ: 8 जुलाई 2025 (देवशयनी एकादशी)

समापन: 5 नवम्बर 2025 (प्रबोधिनी एकादशी)

पौराणिक महत्त्व:

पुराणों में चातुर्मास का उल्लेख विविध रूपों में मिलता है:

  1. श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और इस दौरान पृथ्वी पर अधर्म बढ़ सकता है, इसलिए साधु-संत और गृहस्थजन अधिक पूजा-पाठ, व्रत और संयम का पालन कर पुण्य अर्जित करते हैं।
  2. महाभारत में उल्लेख मिलता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को चातुर्मास में ध्यान और तप का महत्त्व समझाया।
  3. जैन परंपरा में भी चातुर्मास का विशेष महत्त्व है। साधु-संत एक स्थान पर निवास कर धर्म-प्रवचन, ध्यान और आत्मचिंतन करते हैं।

निक परिप्रेक्ष्य में चातुर्मास का वैज्ञानिक महत्त्व:

वर्षा ऋतु में जलजनित रोग फैलते हैं, अतः साधु-संत यात्रा न कर एक स्थान पर रहते हैं।

भोजन में संयम रखने से पाचन संबंधी विकारों से रक्षा होती है।

अधिक समय घर में रहकर साधना करने से मानसिक संतुलन और आत्मचिंतन को बढ़ावा मिलता है।

चातुर्मास में क्या करना चाहिए?

  1. व्रत और तपस्या:

सोमवार: शिव उपासना

मंगलवार: हनुमान व्रत

गुरुवार: विष्णु पूजन, सत्यनारायण कथा

शुक्रवार: लक्ष्मी उपासना

शनिवार: शनि पूजन, श्री हनुमान अर्चना

  1. विशेष व्रत:

एकादशी व्रत (हर माह दो बार)

हरियाली तीज, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, नवरात्रि आदि पर्व

  1. संयम:

ब्रह्मचर्य का पालन

रात्रिभोजन का त्याग

अधिक तैलीय, मांसाहारी, प्याज-लहसुन युक्त भोजन से परहेज

  1. पाठ और पूजा विधि:

विष्णु सहस्रनाम, रामरक्षा स्तोत्र, भगवद्गीता पाठ

तुलसी पूजन और दीपदान

श्रीमद्भागवत कथा, रामायण, चालीसा का पाठ

क्या न करें? (निषेध)

विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन आदि शुभ संस्कार नहीं किए जाते।

अधिक यात्रा से परहेज करें।

कड़वे, अधिक गरिष्ठ या बासी भोजन से बचें।

पसंहार:

चातुर्मास केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को संयमित, सात्विक और आत्मकेन्द्रित बनाने का अवसर है। यह समय है आत्ममंथन का, जब व्यक्ति भौतिक आकर्षण से हटकर आत्मकल्याण की दिशा में अग्रसर होता है।

यदि समाज इस अवसर का पूर्ण रूप से लाभ उठाए तो निश्चित रूप से यह चातुर्मास मन, वचन और कर्म की शुद्धि का श्रेष्ठ साधन बन सकता है।

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