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योगी सरकार के नेतृत्व में ‘कैच द रेन 2025’ बना जल चेतना का अभियान

  • June 21, 2025
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जल शक्ति अभियान के तहत 1.66 लाख से अधिक कार्यों से बढ़ी जल-संरक्षण की ताकत अभियान के साथ जनभागीदारी से साकार हो रहा जल सशक्त उत्तर प्रदेश का

योगी सरकार के नेतृत्व में ‘कैच द रेन 2025’ बना जल चेतना का अभियान

जल शक्ति अभियान के तहत 1.66 लाख से अधिक कार्यों से बढ़ी जल-संरक्षण की ताकत

अभियान के साथ जनभागीदारी से साकार हो रहा जल सशक्त उत्तर प्रदेश का सपना

22 मार्च से 13 जून के बीच वाटर हार्वेस्टिंग से जुड़े 17,557 कार्य पूर्ण, 16,561 प्रगति पर

पारंपरिक जल स्रोतों का कायाकल्प, वाटरशेड, सोकपिट, फॉरेस्टेशन से जुड़ी रिकॉर्ड पहल

Jagrat Times, लखनऊ : जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश ने ‘जल शक्ति अभियान: कैच द रेन 2025’ के तहत ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज की हैं। 22 मार्च से 13 जून 2025 के बीच कुल 1,66,000 से अधिक जल-संरक्षण कार्य या तो पूर्ण हो चुके हैं या प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह अभियान सिर्फ एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि “जन-भागीदारी से जन-जागरूकता” का पर्याय बन गया है। जल संचयन, वर्षा जल संचयन, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनरोद्धार और वनरोपण जैसे अनेक कार्यों को जिलास्तर पर तीव्रता से क्रियान्वित किया जा रहा है।

जल संचयन की दिशा में तेजी से बढ़ रहे कदम
17,557 कार्य पूर्ण और 16,561 कार्य प्रगति पर हैं जो जल संचयन और रेन वाटर हार्वेस्टिंग से सीधे जुड़ते हैं। इसी तरह, मनरेगा के तहत पारंपरिक जल स्रोतों के 5,714 कार्य पूर्ण और 5,093 कार्य प्रगति पर हैं। सोकपिट व स्टैबलाइजेशन पांड के 3,825 कार्य पूर्ण और 512 कार्य प्रगति पर हैं। वाटरशेड डेवलपमेंट के 66,135 कार्य पूर्ण और 52,097 कार्य प्रगति पर हैं। इंटेंसिव फॉरेस्टेशन के 20,922 कार्य पूर्ण और 23,089 कार्य प्रगति पर हैं।

प्रशिक्षण से जागी चेतना
कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) द्वारा 228 जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम पूर्ण किए जा चुके हैं। इन कार्यक्रमों में किसानों, छात्रों, ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को जल प्रबंधन की तकनीकों से अवगत कराया गया। कार्यों को एग्रीकल्चर व हॉर्टीकल्चर विभागों द्वारा अंजाम दिया गया। जेएसएः सीटीआर एमआईएस पोर्टल पर सभी जिलों के नोडल अधिकारी कार्यों को नियमित रूप से अपडेट कर रहे हैं, जिससे पारदर्शिता के साथ मॉनिटरिंग और प्रभावी मूल्यांकन संभव हो रहा है।

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