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जोधपुर, राजस्थान की मशहूर लेखिका अर्चना त्यागी की जुबानी…”किताबों से दोस्ती अच्छी है…….”

  • June 19, 2025
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Jagrat Times, Kanpur/ आज के तकनीकी दौर में किताबें पढ़ने की सलाह देना बेमानी सा महसूस होता है। सब कुछ मोबाइल पर एक टच से हमारे सामने होता

जोधपुर, राजस्थान की मशहूर लेखिका अर्चना त्यागी की जुबानी…”किताबों से दोस्ती अच्छी है…….”

Jagrat Times, Kanpur/ आज के तकनीकी दौर में किताबें पढ़ने की सलाह देना बेमानी सा महसूस होता है। सब कुछ मोबाइल पर एक टच से हमारे सामने होता है। किसी भी विषय की जानकारी चाहिए तो तुरंत मिल जाती है। फिर किताबों में दिमाग खपाने की क्या जरूरत है। समय किसके पास है इतना आज़ की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में। सबको सब कुछ बस सेकंड में चाहिए होता है। फिर मोबाइल पर कहीं भी बैठकर कोई भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। किताबें पढ़ने के लिए एकांत चाहिए। पैसा भी चाहिए खरीदने के लिए। जगह भी चाहिए बैठकर पढ़ने के लिए।
सारी बातें सही हैं। परंतु एक सच से पर्दा उठाना चाहती हूं। मोबाइल फोन पर उपलब्ध इंटरनेट अपने नाम के अनुरूप ही एक जाल है जो हमारे मस्तिष्क को अपनी गिरफ्त मे लेता जा रहा है। आसानी से ज्ञान की उपलब्धता ने हमारे मस्तिष्क की विचार शक्ति को खतम कर दिया है। किसी भी विषय पर अब विचार विमर्श की आवश्यकता नहीं रह गई है। गलत सही की संभावना भी खतम सी हो गई है। जो उत्तर मिल जाता है हम उसे ही सही मान लेते हैं।

यदि किताबों में ढूंढना पड़े तो एक विषय नहीं कई दूसरे विषय पर भी हम जानकारी ले पाते हैं। किसी एक किताब में कुछ लिखा है, दूसरी में कुछ और, तीसरी में कुछ और। जितनी किताबें पढ़ी जाती हैं, विषय की उतनी ही विस्तृत जानकारी उपलब्ध हो जाती है। यह जानकारी इंटरनेट पर एक साथ उपलब्ध नहीं हो सकती है। जिस वेबसाइट पर हमने देखा उसके लेखक ने जिस किताब से वह जानकारी ली है बस उतनी ही हमें मिल पाती है। यानि अधूरा ज्ञान।
अच्छी किताबों को सबसे अच्छा दोस्त माना गया है। जीवन की हर समस्या से जूझकर विजय प्राप्त करने का रास्ता बताती हैं। सभी विषयों की जानकारी का अपार भंडार किताबों में छुपा हुआ है। इंटरनेट पर भी जो दिख रहा है वह भी किताबों से ही लिया हुआ है परंतु संपूर्ण सामग्री नहीं है।
अतः आवश्यक है कि किताबों को पढ़ा जाए।
किताबों को पढ़ने की आदत बचपन से ही डालनी चाहिए। आदत होने पर किताब पढ़ना फालतू का काम नहीं लगता है बल्कि हर नई किताब नया रोमांच जगाती है। एक किताब पूरी होने पर दूसरी को पढ़ने की ललक पैदा करती है।
किताबों को पढ़ने से स्वास्थय पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है। मोबाइल अथवा लैपटॉप से निकलने वाली हानिकारक किरणों से भी हमारी आंखें और चेहरे को बचाव मिल जाता है।
सबसे अधिक महत्वपूर्ण बात है कि किताब को एक बार दोस्त बना लिया जाए तो जीवन भर ज्ञान का भंडार हमारे साथ चलता है। पढ़ने के साथ ही लिखने की आदत का पड़ जाना बहुत सामान्य है। सभी अच्छे लेखक पढ़ने के शौकीन होते हैं। किताब को पढ़कर कुछ न कुछ हमारे मस्तिष्क में अवश्य चलता रहता है। उसे लिखने की आदत हो तो कितनी नई किताबें तैयार हो सकती हैं।
आवश्यकता एक दृढ़ निश्चय की है। सही जीवन मंत्र की है। जीवित तो बहुत से लोग रहते हैं परंतु एक अनुकरणीय जीवन जीने वाले कम होते हैं। सफल व्यक्तियों, वैज्ञानिकों, दार्शनिकों और विचारकों की जीवनी यदि पढ़ें तो यही निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि किताबें पढ़ने की सभी को आदत रही है।

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