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दिल्ली की सात वर्षीय वान्या शर्मा ग्लोबल योगा आइकन अवार्ड से सम्मानित

  • May 27, 2025
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वान्या शर्मा ने बनाया 12वां विश्व रिकॉर्ड, सबसे कम उम्र में योग में जीत इंटरनेशनल खिताब सांसों की लय से गूँज उठा विश्व मंच Jagrat Times, Kanpur/ जब

दिल्ली की सात वर्षीय वान्या शर्मा ग्लोबल योगा आइकन अवार्ड से सम्मानित

वान्या शर्मा ने बनाया 12वां विश्व रिकॉर्ड, सबसे कम उम्र में योग में जीत इंटरनेशनल खिताब

सांसों की लय से गूँज उठा विश्व मंच

Jagrat Times, Kanpur/ जब सपने पालने की उम्र हो, और कोई साधना की राह पकड़ ले—तो समझिए, कोई असाधारण आत्मा इस धरती पर अवतरित हुई है।दिल्ली की सात वर्षीय वान्या शर्मा ऐसी ही एक दिव्य चिंगारी हैं, जिन्होंने आज “यंगेस्ट ग्लोबल योगा आइकॉन” बनकर यूनिवर्सल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना 12वां विश्व रिकॉर्ड दर्ज कर इतिहास रच दिया है।

बचपन की मुस्कान में तप का तेज

जहाँ बच्चों के कमरे खिलौनों से भरते हैं, वहाँ वान्या का कमरा योगा मैट, ध्यानपट और वेद मंत्रों की गूँज से संजीवनी पाता है। मात्र दो वर्ष की आयु में योग के पथ पर पहला कदम रखने वाली वान्या की साधना आज अंतरराष्ट्रीय मंचों की प्रेरणा बन चुकी है।
दिल्ली के एस.डी. पब्लिक स्कूल, पीतमपुरा की द्वितीय कक्षा की छात्रा वान्या हर सुबह सूर्य नमस्कार और ध्यान से अपने दिन की शुरुआत करती हैं।मौसम चाहे कोई भी हो, उनकी लगन स्थिर और अविचल रहती है।

संस्कार से शक्ति तक परिवार की प्रेरणा

वान्या के माता-पिता, हेमंत और हिमानी शर्मा, स्वयं योग के अनन्य साधक हैं। उन्होंने न केवल योग को अपनाया, बल्कि उसे वान्या के व्यक्तित्व में इस तरह पिरोया कि वह आज भारत की सांस्कृतिक आत्मा की नन्ही प्रतिनिधि बन चुकी हैं।

सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, एक तपस्विनी की चमक

वान्या के नाम अब तक दर्ज 12 विश्व रिकॉर्ड्स गिनीज़, एशिया, इंडिया और इंटरनेशनल बुक्स की शोभा बढ़ा रहे हैं। लेकिन इन संख्याओं से परे, उनकी साधना का मूल मंत्र है: “अहं ब्रह्मास्मि” — मैं ब्रह्म हूँ, मैं ही ऊर्जा हूँ।

सम्मानों की गाथा, प्रेरणा की महाकाव्य

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम अवार्ड से लेकर रतन टाटा मेमोरियल अवार्ड, ग्लोबल फेम अवार्ड से शहीद भगत सिंह नोबल अवार्ड तक — वान्या की झोली में न सिर्फ मेडल हैं, बल्कि अनगिनत दिलों की दुआएँ हैं।

सेवा से समाधि तक: योग से समाज की ओर

“Yoga for Har Ghar” अभियान की संयोजिका के रूप में, वान्या दिव्यांग बच्चों को भी योग सिखा रही हैं — एक ऐसा कार्य, जहाँ शरीर से नहीं, आत्मा से संवाद होता है। नेपाल सहित कई देशों में वर्चुअल योग सत्रों के माध्यम से वह भारतीय संस्कृति की मशाल थामे चल रही हैं।

उनका एक वाक्य गूंज बन गया है:
“योग शरीर नहीं, चेतना को लचीला बनाता है।”

भविष्य की संकल्पना: “Yoga Littles” और “स्वस्थ भारत”

वान्या का अगला स्वप्न है “Yoga Littles” — एक ऐसा डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म जहाँ बच्चे खेल-खेल में योग को अपनाएँ और स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर हों।
साथ ही, वे “स्वस्थ भारत” नामक डॉक्युमेंट्री पर कार्य कर रही हैं, जो आयुर्वेद, योग और भारत की सांस्कृतिक विरासत को विश्व के सामने एक नई दृष्टि से प्रस्तुत करेगी।

वान्या कल्कि फाउंडेशन की ब्रांड एम्बेसडर भी हैं।


वान्या शर्मा: सिर्फ नाम नहीं, एक युग की उद्घोषणा

आज वान्या एक नन्ही बच्ची से कहीं अधिक हैं — वह एक विचार हैं, एक ऊर्जा हैं, जो यह संदेश देती हैं:
“बदलाव उम्र से नहीं, दृष्टिकोण से आता है।”

क्या हम अपने बच्चों को सिर्फ अंकों की दौड़ में लगा रहे हैं, या उन्हें वह ज्ञान दे रहे हैं जो जीवन को सार्थक बनाता है?

वान्या शर्मा — एक नन्हा दीप, जो अब पूरी दुनिया को योग, साधना और संस्कार की रोशनी से आलोकित कर रहा है।

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