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ज्यादा एंटीबायोटिक से शरीर में रेजिस्टेंस होती है प्रभावित : डॉ. मेनका

  • December 11, 2025
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-हमेशा ध्यान रहें…कभी भी प्रचार देखकर किसी भी प्रकार की कोई भी दवा नहीं खानी चाहिए -हर इंसान की शारीरिक रचना अलग होती है, इसलिए सब पर एक

ज्यादा एंटीबायोटिक से शरीर में रेजिस्टेंस होती है प्रभावित : डॉ. मेनका

-हमेशा ध्यान रहें…कभी भी प्रचार देखकर किसी भी प्रकार की कोई भी दवा नहीं खानी चाहिए

-हर इंसान की शारीरिक रचना अलग होती है, इसलिए सब पर एक जैसी दवा लागू नहीं होती

-प्राकृतिक पदार्थों से प्राप्त होम्योपैथिक उपचार शरीर की उपचार प्रक्रिया को करते हैं सक्रिय

Jagrat Times, Kanpur/ शरीर में थोड़ी सी भी दिक्कत होने पर भी एंटीबायोटिक दवा खाना लेना उचित नहीं होता है। ज्यादा या अक्सर एंटीबायोटिक दवा खाने से शरीर में रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता (रेजिस्टेंस यानी प्रतिरोध) प्रभावित होती है। इसके साथ ही शरीर के अन्य अंगों पर भी प्रभाव पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। एंटीबायोटिक दवाओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए कानपुर और आसपास जिलों में मशहूर सीनियर होम्योपैथिक फिजिशियन डॉक्टर मेनका ने बताया कि अखबार, रेडियो, टीवी और इंटरनेट पर होने वाले प्रचार को देखकर कभी भी कोई दवा का सेवन नहीं करना चाहिए। चाहे वो एंटीबायोटिक हो या फिर किसी भी बीमारी से संबंधित दवा। प्रचार में दिखाए जाने वाले लक्षण सभी पर लागू नहीं होते हैं। क्योंकि हर इंसान की शारीरिक क्षमता और शरीर के अंदर रोगाणुओं से लड़ने वाले कारकों की स्थिति बिल्कुल अलग होती है। इसलिए डॉक्टर से पूरी तरह शहीर की जांच कराने के बाद ही संबंधित बीमारी की दवा लेना ही उचित है। नहीं तो इस लापरवाही जान जोखिम में पड़ सकती है।

डॉक्टर मेनका ने बताया कि एंटीबायोटिक की अवधि तय करने का काम केवल डॉक्टर ही कर सकते हैं, वे ही संक्रमण के लिए सही दवा और खुराक बताते हैं। अधिकांश एंटीबायोटिक कोर्स सात से चौदह दिनों के होते हैं, कुछ छोटे कोर्स भी प्रभावी हो सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण है कि बताई गई अवधि तक दवा लें, खुराक न छोड़ें, और बची हुई दवा भविष्य के लिए न रखें, इससे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (प्रतिरोध) का खतरा कम होता है। अक्सर एक से तीन दिन में सुधार दिखने लगता है, लेकिन संक्रमण को जड़ से खत्म करने के लिए पूरा कोर्स लेना जरूरी है। यदि तीन दिन बाद भी आराम न मिले या लक्षण बिगड़े, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर जो समय और खुराक बताएं, इसका सख्ती से पालन करें, क्योंकि यह आपकी स्थिति के लिए सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है।

डॉक्टर मेनका ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि होम्योपैथी एक पूरक उपचार प्रदान करती है, होम्योपैथी एंटीबायोटिक हल्के और पुराने या बार-बार होने वाले जीवाणु संक्रमणों के लिए विशेष रूप से प्रभावी हैं। प्राकृतिक पदार्थों से प्राप्त होम्योपैथिक उपचार शरीर की उपचार प्रक्रिया को सक्रिय करते हैं। होम्योपैथी एंटीबायोटिक्स का पूरक या विकल्प हो सकती है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करके काम करती है, खासकर हल्के या पुराने संक्रमणों में; यह सुरक्षित मानी जाती है, इसके कोई ज्ञात दुष्प्रभाव नहीं हैं, और यह एंटीबायोटिक प्रतिरोध को बढ़ावा नहीं देती, बल्कि कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि यह बैक्टीरिया के विकास को रोक सकती है और एंटीबायोटिक दवाओं के साथ मिलकर उनकी प्रभावशीलता बढ़ा सकती है, जिससे यह पारंपरिक एंटीबायोटिक के उपयोग को कम करने का एक समग्र और सुरक्षित तरीका बन जाती है। एंटीबायोटिक्स ऐसी दवाइयां हैं जो बैक्टीरिया के कारण होने वाले संक्रमण और बीमारियों का इलाज करती हैं। सभी एंटीबायोटिक बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं ताकि आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली बैक्टीरिया से अधिक आसानी से लड़ सके। डॉक्टर आपके संक्रमण के प्रकार के उपचार के लिए सबसे उपयुक्त एंटीबायोटिक लिखते हैं। एंटीबायोटिक कितने दिन लेनी चाहिए यह संक्रमण के प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है, लेकिन आमतौर पर यह पांच से चौदह दिनों का कोर्स होता है, जिसे डॉक्टर बताते हैं; आपको डॉक्टर की सलाह के बिना इसे बीच में नहीं छोड़ना चाहिए, भले ही आप बेहतर महसूस करने लगे, ताकि एंटीबायोटिक प्रतिरोध को रोका जा सके और संक्रमण पूरी तरह ठीक हो सके।

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