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डॉक्टर, शिक्षक और शिक्षित व्यक्ति…समाज के सच्चे स्तंभ खतरे में : डॉ दीपिका

  • June 10, 2026
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-महाराणा प्रताप डेंटल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपिका शुक्ला ने अनेक स्थानों पर डॉक्टरों पर हमले और शिक्षकों के अपमान पर चिंता व्यक्त की -एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.

डॉक्टर, शिक्षक और शिक्षित व्यक्ति…समाज के सच्चे स्तंभ खतरे में : डॉ दीपिका

-महाराणा प्रताप डेंटल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपिका शुक्ला ने अनेक स्थानों पर डॉक्टरों पर हमले और शिक्षकों के अपमान पर चिंता व्यक्त की

-एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपिका शुक्ला ने कहा कि समाज के सच्चे स्तंभों की रक्षा करना, समाज के भविष्य की रक्षा करना है

Jagrat Times, Kanpur/ कानपुर: किसी भी सभ्य और विकसित समाज की नींव उसके डॉक्टरों, शिक्षकों और शिक्षित नागरिकों पर टिकी होती है। ये वे लोग हैं जो समाज को ज्ञान, स्वास्थ्य और सही दिशा प्रदान करते हैं। इसलिए इन्हें समाज के सच्चे स्तंभ कहा जाता है। लेकिन आज विडंबना यह है कि यही स्तंभ स्वयं खतरे में दिखाई दे रहे हैं।

शिक्षक भविष्य की पीढ़ी का निर्माण करते हैं

शिक्षक भविष्य की पीढ़ी का निर्माण करते हैं। डॉक्टर लोगों के जीवन की रक्षा करते हैं और शिक्षित व्यक्ति समाज को प्रगति और विकास का मार्ग दिखाते हैं। इनके योगदान के बिना किसी भी राष्ट्र की उन्नति की कल्पना नहीं की जा सकती। फिर भी आज इनके प्रति सम्मान और विश्वास में कमी आती दिखाई दे रही है। अनेक स्थानों पर डॉक्टरों पर हमले, शिक्षकों का अपमान और शिक्षित वर्ग की उपेक्षा जैसी घटनाएँ चिंता का विषय हैं। जो लोग समाज की सेवा में अपना जीवन समर्पित करते हैं, वही आज असुरक्षा और अनादर का सामना कर रहे हैं। यह केवल व्यक्तियों पर हमला नहीं है, बल्कि समाज की उस नींव पर प्रहार है जिस पर उसका भविष्य टिका हुआ है।

असुरक्षा के वातावरण में समाज का संतुलन और विकास भी होगा प्रभावित

यदि किसी भवन के स्तंभ कमजोर हो जाएँ, तो वह भवन अधिक समय तक सुरक्षित नहीं रह सकता। उसी प्रकार यदि डॉक्टर, शिक्षक और शिक्षित नागरिक भय, असम्मान और असुरक्षा के वातावरण में रहेंगे, तो समाज का संतुलन और विकास भी प्रभावित होगा। ज्ञान, स्वास्थ्य और नैतिक मूल्यों का ह्रास होने लगेगा।
समय की मांग है कि हम समाज के इन सच्चे स्तंभों का सम्मान करें, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें और उनके योगदान को उचित महत्व दें। एक स्वस्थ और प्रगतिशील समाज तभी संभव है जब उसके डॉक्टर, शिक्षक और शिक्षित नागरिक सम्मान और गरिमा के साथ अपना कार्य कर सकें।
आइए, हम यह संकल्प लें कि समाज के इन आधार स्तंभों की रक्षा करेंगे और उन्हें वह सम्मान देंगे जिसके वे वास्तविक हकदार हैं। क्योंकि जब स्तंभ ही खतरे में हों, तो समाज का भविष्य भी सुरक्षित नहीं रह सकता। “समाज के सच्चे स्तंभों की रक्षा करना, समाज के भविष्य की रक्षा करना है।”

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