वायु प्रदूषण अस्थमा के मरीजों के लिए हानिकारक : डॉक्टर मेनका
- May 5, 2026
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-लोगों को जागरूक करने के लिए 6 मई यानी मंगलवार को मनाया जा रहा है विश्व अस्थमा दिवस -अस्थमा यानी दमा पर सीनियर होम्योपैथिक फिजिशियन डॉक्टर मेनका ने
-लोगों को जागरूक करने के लिए 6 मई यानी मंगलवार को मनाया जा रहा है विश्व अस्थमा दिवस
-अस्थमा यानी दमा पर सीनियर होम्योपैथिक फिजिशियन डॉक्टर मेनका ने दी महत्वपूर्ण जानकारियां
Jagrat Times, Kanpur/ विश्व अस्थमा दिवस एक वैश्विक स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम है जो हर साल मई के पहले मंगलवार को मनाया जाता है ताकि दुनिया भर में अस्थमा के बारे में जागरूकता फैलाई जा सके । इस वर्ष 2025 का विश्व अस्थमा दिवस 6 मई यानी मंगलवार को मनाया जा रहा है। इस बीमारी के विषय में विस्तार से चर्चा करते हुए कानपुर और आसपास जिलों में मशहूर सीनियर होम्योपैथिक फिजिशियन डॉक्टर मेनका ने बताया कि अस्थमा यानी दमा एक क्रोनिक श्वसन रोग है, जो श्वसन नलियों में सूजन और संकुचन के कारण होता है। इसके प्रमुख कारणों में आनुवंशिकता, एलर्जी जैसे धूल, पालतू जानवर या वायु प्रदूषण/धुआं, श्वसन संक्रमण जैसे फ्लू और मोटापा शामिल हैं। ये कारक सांस की नली में सूजन पैदा कर सांस लेने में कठिनाई, घरघराहट और खांसी का कारण बनते हैं।

इस बीमारी के बारे में और जानकारी देते हुए डॉक्टर मेनका ने बताया कि अस्थमा यानी दमा होने के कौन-कौन से कारण हो सकते हैं, इस पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कएलर्जी : धूल के कण, पालतू जानवरों के बाल यानी रूसी, मोल्ड, और पराग कण एलर्जी पैदा कर अस्थमा को ट्रिगर कर सकते हैं। वायु प्रदूषण और धुआं यानी सिगरेट का धुआं, वाहन का धुआं, कारखाने का धुआं, और तेज गंध जैसे परफ्यूम और अगरबत्ती श्वसन मार्ग को उत्तेजित करते हैं। श्वसन संक्रमण : सामान्य सर्दी-जुकाम, फ्लू, और साइनस संक्रमण अस्थमा के दौरे को सक्रिय कर सकते हैं। इसके अलावा आनुवंशिकता यानी परिवार में किसी को अस्थमा होने पर जोखिम बढ़ जाता है। दवाएं जैसे एस्पिरिन या अन्य दर्द निवारक दवाएं भी कारण हो सकती हैं। मोटापा यानी अधिक वजन होने से फेफड़ों पर दबाव पड़ता है।

डॉक्टर मेनका ने बताया कि अस्थमा (दमा) श्वसन नली में सूजन और संकुचन के कारण फेफड़ों की एक पुरानी बीमारी है, जिसके प्रमुख लक्षणों में सांस फूलना, सीने में जकड़न, और घरघराहट जैसे सीटी की आवाज शामिल हैं। यह लक्षण अक्सर रात या सुबह के समय खराब हो जाते हैं। इस बीमारी के और लक्षणों पर प्रकाश डालते हुए डॉक्टर मेनका ने बताया कि सांस लेने में कठिनाई या सांस फूलना यानी सांस लेने में अत्यधिक परेशानी होना।घरघराहट यानी सांस छोड़ते समय सीटी जैसी आवाज आना। सीने में जकड़न या भारीपन यानी सीने में कसाव या भारी दबाव महसूस होना। लगातार खांसी यानी यह सूखी या बलगम वाली हो सकती है, जो रात में या सुबह बढ़ जाती है। बोलने में कठिनाई यानी सांस की कमी के कारण लंबे वाक्य बोलने में असमर्थता। इसके अलावा यदि सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई, होंठों का नीला पड़ना, या बोलने में असमर्थता हो, तो यह गंभीर अस्थमा दौरा हो सकता है और तुरंत चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होती है।
डॉक्टर मेनका ने बताया कि अस्थमा के लिए सबसे खराब खाद्य पदार्थों में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, उच्च सोडियम वाले खाद्य पदार्थ, शराब, सल्फाइट युक्त चीजें (अचार, सूखे मेवे), और डेयरी उत्पाद शामिल हैं। संतृप्त वसा वाले फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक्स भी फेफड़ों की सूजन बढ़ाकर अस्थमा के लक्षणों को गंभीर कर सकते हैं।