-महाराणा प्रताप डेंटल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपिका शुक्ला ने किताब लिखकर स्थापित किए नए आयाम
-प्रोफेसर डॉ. दीपिका शुक्ला ने कहा-महिला प्रोफेसर माइक्रोबायोलॉजी के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण शोध कर निभा रहीं हैं महत्वपूर्ण भूमिका
Jagrat Times, कानपुर : महाराणा प्रताप डेंटल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपिका शुक्ला ने अपनी योग्यता, अनुभव, जानकारी और पढ़ाने के अद्भुत तरीकों से छात्र एवं छात्राओं के साथ ही समाज में भी अपनी विशेष पहचान बनाई है। निस्वार्थ भाव से छात्र एवं छात्राओं को शिक्षित कर नारी सशक्तिकरण का अनमोल उदाहरण प्रस्तुत कर सबको जागरूक और प्रेरित करने का बेमिसाल काम किया है। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपिका शुक्ला का मानना है कि वर्तमान समय में महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी योग्यता और कार्यकुशलता के दम पर लगातार मुकाम हासिल कर समाज में विशेष पहचान बना रहीं हैं। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपिका शुक्ला की माइक्रोबायोलॉजी में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण और बहुआयामी है, जिसमें वे अनुसंधान, शिक्षा और नेतृत्व में योगदान करती हैं, जैसे कि नई दवाओं की खोज, रोग के प्रसार को रोकना और भविष्य के वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित करना। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डॉ. दीपिका शुक्ला अकादमिक और अनुसंधान के क्षेत्र में बाधाओं को दूर करने में हमेशा अग्रणी रहीं हैं, जैसे कि नेतृत्व के पदों तक पहुँचना और समानता व समावेश के लिए काम करना।
एंटीबायोटिक प्रतिरोध को समझने के लिए काम करती हैं
विशेष बातचीत में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपिका शुक्ला ने बताया कि महिला प्रोफेसर माइक्रोबायोलॉजी के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण शोध करती हैं, जिसमें पर्यावरण माइक्रोबायोलॉजी, इम्यूनोलॉजी, और माइक्रोबियल बायोडिग्रेडेशन शामिल हैं। वे नए रोगाणुओं की खोज करती हैं, एंटीबायोटिक प्रतिरोध को समझने के लिए काम करती हैं, और रोगों के कारण और उपचार की पहचान करती हैं। उन्होंने कई शोध पत्र और पुस्तकें प्रकाशित की हैं, जिससे उनके क्षेत्र में योगदान को बढ़ावा मिला है। महिला प्रोफेसर की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए डॉ. दीपिका शुक्ला ने बताया कि वे स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को माइक्रोबायोलॉजी के विभिन्न पहलुओं में प्रशिक्षित करती हैं, जिसमें प्रयोगशाला कार्य और अनुसंधान शामिल है। वे नए शैक्षणिक कार्यक्रमों और कार्यशालाओं के माध्यम से छात्रों को नवीनतम वैज्ञानिक प्रगति से अवगत कराती हैं। वे छात्रों को शोध और करियर के लिए मार्गदर्शन प्रदान करके भविष्य के माइक्रोबायोलॉजिस्ट और वैज्ञानिकों के लिए आधार तैयार करती हैं। इस विषय में विस्तृत जानकारी देते हुए डाॅ. दीपिका शुक्ला ने बताया कि कई महिला प्रोफेसरों ने विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों में विभागाध्यक्ष जैसे नेतृत्व के पदों को संभाला है, जिससे वे अकादमिक नेतृत्व का प्रदर्शन करती हैं। वे विज्ञान में समानता, विविधता और समावेशन को बढ़ावा देने के लिए काम करती हैं, और महिला माइक्रोबायोलॉजिस्ट के योगदान को सम्मानित करती हैं। उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों के विकास में भी योगदान दिया है, जैसे कि जैव-आतंकवाद के खतरे का जवाब देना।