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अनियमित दिनचर्या और असंतुलित खानपान से बढ़ता है मोटापा : डॉक्टर मेनका

  • February 8, 2026
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-मोटापे से घबराएं नहीं, कम कैलोरी आहार व नियमित एक्सरसाइज से मिल जाती है राहत -अत्यधिक वजन होने से सांस फूलना, सीने में भारीपन, घुटनों, जोड़ों और पीठ

अनियमित दिनचर्या और असंतुलित खानपान से बढ़ता है मोटापा : डॉक्टर मेनका

-मोटापे से घबराएं नहीं, कम कैलोरी आहार व नियमित एक्सरसाइज से मिल जाती है राहत

-अत्यधिक वजन होने से सांस फूलना, सीने में भारीपन, घुटनों, जोड़ों और पीठ में होता है दर्द

-10 से 15 मिनट सूर्य नमस्कार करने से शरीर के सभी अंगों के व्यायाम के लिए लाभकारी

Jagrat Times, कानपुर :अनियमित दिनचर्या के साथ ही अनियमित खानपान से अक्सर आम इंसान किसी न किसी बीमारी से ग्रसित हो जाता है। ऐसी ही एक बीमारियों में से एक मोटापा। इस बीमारी पर विस्तार से जानकारी देते हुए कानपुर व आसपास जिलों में मशहूर सीनियर होम्योपैथिक फिजिशियन डॉक्टर मेनका ने बताया कि मोटापा शरीर में अत्यधिक वसा जमा होने की स्थिति है, जिसके मुख्य लक्षणों में पेट और जांघों पर चर्बी बढ़ना, तेजी से सांस फूलना, थकान, जोड़ों/पीठ में दर्द, अत्यधिक पसीना आना और नींद संबंधी समस्याएं (जैसे स्लीप एपनिया) शामिल हैं। यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। इस बीमारी से होने वाले प्रमुख लक्षणों पर प्रकाश डालते हुए डॉक्टर मेनका ने बताया कि ऐसा आहार जिसमें कैलोरी की मात्रा अधिक हो, फल और सब्जियों की कमी हो, फास्ट फूड भरपूर मात्रा में हो, और उच्च कैलोरी वाले पेय पदार्थों और अत्यधिक मात्रा में परोसे जाने वाले भोजन से भरपूर हो, वजन बढ़ने में योगदान देता है। गैस्ट्रोएसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज (जीईआरडी) और मोटापा आज की दो सबसे आम स्वास्थ्य समस्याएं हैं, और ये आपस में घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई हैं। मोटापे और पेट के आसपास चर्बी बढ़ने की दर के साथ-साथ जीईआरडी की व्यापकता भी बढ़ रही है। शरीर में विशेषकर पेट पर चर्बी का जमा होना (ढीलापन)। थोड़ी सी शारीरिक गतिविधि में सांस फूलना या सीने में भारीपन। शरीर का अत्यधिक वजन होने के कारण घुटनों, जोड़ों और पीठ में दर्द, और हर समय थकान महसूस होना। त्वचा की सिलवटों में इन्फेक्शन, चकत्ते और स्ट्रेच मार्क्स (खिंचाव के निशान) होना। जोर से खर्राटे लेना और नींद के दौरान सांस रुकना (स्लीप एपनिया)। सामान्य से अधिक गर्मी लगना और पसीना आना। आत्मविश्वास में कमी, तनाव, अवसाद और सामाजिक जीवन पर असर। इसके अलावा भूख ज्यादा लगना, बार-बार खाना आदि। डॉक्टर मेनका ने बताया कि पाचन संबंधी समस्याएं अप्रत्याशित वजन घटाने के 10% से 20% मामलों के लिए जिम्मेदार होती हैं।

पाचन संबंधी बीमारियों से सूजन और कुअवशोषण हो सकता है , जो आपके चयापचय को प्रभावित कर सकता है और शरीर की कैलोरी और मैक्रोन्यूट्रिएंट्स को ग्रहण करने की क्षमता में बाधा डाल सकता है। डॉक्टर मेनका ने बताया कि होम्योपैथिक इलाज कराने से इस बीमारी से आराम मिलता है। इसके अलावा मोटापे की बीमारी से बचने के लिए या उसे कम करने के लिए संतुलित, कम कैलोरी वाला आहार, नियमित व्यायाम सप्ताह में लगभग 150 मिनट और जीवनशैली में बदलाव जरूरी है। चीनी, जंक फूड कम करें और फाइबर, प्रोटीन, फल-सब्जियां ज्यादा खाएं। रोजाना पानी पिएं, पर्याप्त नींद लें और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। उन्होंने बताया कि अपनी जरूरत से कम कैलोरी का सेवन करें। भोजन में दालें, फल, सब्जियां, साबुत अनाज और कम वसा वाला प्रोटीन शामिल करें। मीठे पेय, सोडा और जंक फूड का सेवन बंद करें। थाली में 1/4 प्रोटीन, 1/4 अनाज और बाकी सब्जी व सलाद रखें। इसके अलावा सुबह-सुबह एक्सरसाइज, व्यायाम, योग, टहलना और दौड़ना भी जरूर चाहिए। रोजाना 20-30 मिनट व्यायाम करें, जिसमें कार्डियो और मांसपेशियों की मजबूती के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शामिल हो। लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का उपयोग करें। प्रतिदिन 10,000 कदम चलने का लक्ष्य रखें। कम से कम 10 से 15 मिनट सूर्य नमस्कार करने से शरीर के सभी अंगों के व्यायाम के लिए अच्छा है।

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