सोरायसिस की बीमारी से घबराएं नहीं, होम्योपैथिक में कारगर इलाज : डॉक्टर मेनका
- January 26, 2026
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-इस बीमारी में त्वचा पर मोटी, लाल, पपड़ीदार परतें बन जाती हैं, जो खुजलीदार होती हैं -शरीर में दिखने वाले किसी भी लक्षण को संबंधित चिकित्सक को विस्तार
-इस बीमारी में त्वचा पर मोटी, लाल, पपड़ीदार परतें बन जाती हैं, जो खुजलीदार होती हैं
-शरीर में दिखने वाले किसी भी लक्षण को संबंधित चिकित्सक को विस्तार से बताना चाहिए
-जीवनशैली में बदलाव कर धैर्य के साथ नियमित दवा लेने से बीमारी से मिलता है छुटकारा
Jagrat Times, कानपुर : हमारे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण है स्वस्थ जीवन। इसलिए अपने स्वास्थ्य को हमेशा प्राथमिकता में रखना चाहिए क्योंकि जब तक हम पूरी तरह से स्वस्थ नहीं होंगे तब तक नहीं हम कोई भी काम सुचारू रूप से नहीं कर पाएंगे। खान-पान में गड़बड़ी के साथ ही प्रदूषण के कारण अक्सर लोगों को त्वचा संबंधित बीमारियों का सामना करना पड़ता है। त्वचा संबंधित बीमारियों पर ही बहुत ही गहराई और विस्तार से चर्चा करते हुए कानपुर और आसपास जिलों में मशहूर सीनियर होम्योपैथिक फिजिशियन डॉक्टर मेनका ने बताया कि सोरायसिस त्वचा से जुड़ी एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें त्वचा की कोशिकाएं सामान्य से बहुत तेजी से बढ़ने लगती हैं, जिससे त्वचा पर मोटी, लाल, पपड़ीदार परतें बन जाती हैं, जो अक्सर खुजलीदार होती हैं और शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती हैं। यह बीमारी तनाव, आनुवंशिकी और पर्यावरणीय कारकों से बढ़ सकती है, जिसके लिए दवा, घरेलू उपचार और जीवनशैली में बदलाव (जैसे तनाव प्रबंधन) की आवश्यकता होती है। डॉक्टर मेनका ने बताया कि सोरायसिस एक दीर्घकालिक स्थिति है, लेकिन सही उपचार और प्रबंधन से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।

डॉक्टर मेनका ने बताया कि सोरायसिस की बीमारी को आसानी से होम्योपैथिक से ठीक किया जा सकता है। बिल्कुल भी घबराने या परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके लिए संबंधित डॉक्टर को शरीर में दिखने वाले सभी लक्षणों को विस्तार से बताने की जरूरत है। साथ ही चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली महत्वपूर्ण सलाह का पूर्णतया पालने करते हुए नियमित दवा करना भी बहुत जरूरी है। धैर्य के साथ सभी नियमों का पालन करने इस बीमारी से छुटकारा मिल सकता है। इसके अलावा इस बीमारी को नियंत्रित करके ठीक करना है तो कॉर्टिकोस्टेरॉइड क्रीम, विटामिन-डी एनालॉग, मेथोट्रेक्सेट के अलावा घरेलू उपाय में एलोवेरा, ओमेगा-3 युक्त भोजन (मछली, अलसी), मॉइस्चराइज़र, नम स्नान का प्रयोग करना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि हमको जीवनशैली में बदलाव करने की आवश्यकता करने की जरूरत है जैसे तनाव कम करना (प्राणायाम), स्वस्थ आहार, धूम्रपान-शराब से बचना आदि।

सोरायसिस की बीमारी होने पर शरीर में दिखने वाले लक्षणों पर चर्चा करते हुए डॉक्टर मेनका ने बताया कि इससे शरीर की त्वचा पर लाल चकत्ते और मोटी, चांदी जैसी पपड़ी पड़ जाती है। पीड़ित व्यक्ति को खुजली, जलन या दर्द को झेलना पड़ता है। इसके अलावा सूखी, फटी हुई त्वचा जिससे खून भी निकल सकता है।वहीं जोड़ों में सूजन और दर्द (सोरायटिक आर्थराइटिस) को भी झेलना पड़ता है। डॉक्टर मेनका ने बताया कि ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया से प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से त्वचा कोशिकाओं को तेजी से बढ़ने का संकेत देती है। आनुवंशिकी के अंतर्गत परिवार में सोरायसिस का इतिहास को पता किया जाता है। ट्रिगर यानी तनाव, संक्रमण (जैसे स्ट्रेप थ्रोट), कुछ दवाएं (बीटा-ब्लॉकर्स), चोट, धूम्रपान, शराब आदि इसके प्रमुख कारण हैं।