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तनाव शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है : डॉक्टर मेनका

  • January 25, 2026
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-मानसिक तनाव होने पर दिल की धड़कन तेज हो जाती है, पसीना आता है, थकान, सिरदर्द, और मांसपेशियों में खिंचाव होता है -पर्याप्त नींद, योग, मेडिटेशन, व्यायाम के

तनाव शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है : डॉक्टर मेनका

-मानसिक तनाव होने पर दिल की धड़कन तेज हो जाती है, पसीना आता है, थकान, सिरदर्द, और मांसपेशियों में खिंचाव होता है

-पर्याप्त नींद, योग, मेडिटेशन, व्यायाम के साथ ही सकारात्मक सोच व सामाजिक मेलजोल से तनाव को नियंत्रित किया जा सकता है

-होम्योपैथी में इसका इलाज संभव पर नियमित दवा लेने के साथ ही लगातार संतुलित आहार लेना भी आवश्यक

Jagrat Times, कानपुर : वर्तमान समय में पूरी तरह से आर्थिक युग है। हर इंसान सब कुछ हासिल करने के चक्कर में दिन और रात कड़ी मेहनत करता है। इस वजह से न तो वह समय पर पर्याप्त भोजन करता है और न ही पूरी नींद लेता है। जब भी इंसान आवश्यकता से अधिक अपनी जरूरतों को बढ़ा देता है और उसकी महत्वाकांक्षा भी बढ़ती जाती है तो उसके अनुरूप उसे सफलता या संतुष्टि नहीं मिलती है। फलस्वरूप इसका असर उसके शरीर पर पड़ता है और एक समय के बाद वह मानसिक तनाव से ग्रसित हो जाता है। इसके अलावा घरेलू परेशानी और आर्थिक तंगी भी उसके मर्ज को और बढ़ा देती हैं।
इस विषय पर विस्तार से चर्चा करते हुए कानपुर और आसपास जिलों में मशहूर सीनियर होम्योपैथिक फिजिशियन डाॅक्टर मेनका ने बताया कि तनाव यानी स्ट्रैस हमेशा चुनौतीपूर्ण, नए या दबावपूर्ण स्थितियों के प्रति शरीर और मन की एक स्वाभाविक, शारीरिक और भावनात्मक प्रतिक्रिया है। जब आप अभिभूत या नियंत्रण से बाहर महसूस करते हैं, तो शरीर एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन जारी करता है, जो सतर्कता बढ़ाते हैं। कम समय का तनाव प्रेरित कर सकता है, लेकिन लगातार तनाव शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

इस बारे में और जानकारी देते हुए डॉक्टर मेनका ने बताया कि मानसिक तनाव होने पर दिल की धड़कन तेज हो जाती है, पसीना आता है, थकान, सिरदर्द, और मांसपेशियों में खिंचाव होता है। इसके अलावा चिड़चिड़ापन, चिंता, एकाग्रता में कमी, उदासी और बेचैनी भी होती है। तनाव होने के प्रमुख कारणों में काम का बोझ, वित्तीय परेशानियां, रिश्तों में समस्या, बीमारी, या जीवन में बड़े बदलाव का होना शामिल हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि लंबे समय तक रहने पर उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं अवसाद यानी डिप्रेशन की शिकायत हो सकती है।

डॉक्टर मेनका ने कहा कि मानसिक तनाव होने की स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। होम्योपैथिक दवा का इस्तेमाल कर धीरे-धीरे इससे आराम मिलता है और छुटकारा भी मिल जाता है। उन्होंने महत्वपूर्ण सलाह देते हुए कहा कि नियमित व्यायाम, ध्यान, योग और मेडिटेशन के अलावा संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और सकारात्मक सामाजिक मेलजोल से तनाव को नियंत्रित किया जा सकता है। यदि तनाव बेकाबू हो, तो विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। तनाव कम करने के प्रमुख उपायों पर चर्चा करते हुए कहा कि गहरी सांस लेने के व्यायाम, योग, ध्यान, और मांसपेशियों को आराम देने वाले अभ्यास मानसिक तनाव को तुरंत कम करने में मदद करते हैं। हर दिन 20-30 मिनट टहलना, दौड़ना, तैराकी, या साइकिल चलाना एंडोर्फिन हार्मोन छोड़ता है, जो मूड को बेहतर बनाता है। हमेशा समय पर संतुलित आहार लेना चाहिए। शराब और कैफीन से परहेज करना चाहिए। हर दिन 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है। डॉक्टर मेनका ने बताया कि सामाजिक जुड़ाव बहुत जरूरी है जैसे दोस्तों, परिवार या सहयोगियों के साथ समय बिताना चाहिए। अपनों से बात करने से मानसिक बोझ कम होता है। मनोरंजन और शौक का होना भी बहुत जरूरी है। पेंटिंग, संगीत, बागवानी, या पालतू जानवर के साथ समय बिताने जैसी गतिविधियां तनाव कम करने में इससे बहुत लाभ होता है। लगातार काम नहीं करना चाहिए। काम के बीच में ब्रेक लें और प्रकृति के साथ समय बिताएं। धूप में टहलना भी मूड को बेहतर बना सकता है। एक और बात है जो हमेशा ध्यान रखनी चाहिए कि हमेशा सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। अपनी भावनाओं को डायरी में लिखें और उन चीजों पर ध्यान केंद्रित करें जो आपके नियंत्रण में हैं।

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