दस वर्षों से पीड़ित राजन स्वस्थ होने पर बोले-अतुलनीय व महान हैं डॉक्टर मधुलिका
- January 13, 2026
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-डॉक्टर मधुलिका शुक्ला के इलाज से किडनी में 35 मिमी पथरी से मरीज को मिली मुक्ति -स्टोन से पीड़ित राजन मिश्रा ने सितंबर महीने से इलाज कराना शुरू
-डॉक्टर मधुलिका शुक्ला के इलाज से किडनी में 35 मिमी पथरी से मरीज को मिली मुक्ति
-स्टोन से पीड़ित राजन मिश्रा ने सितंबर महीने से इलाज कराना शुरू किया था
-डॉक्टर मधुलिका शुक्ला के अद्भुत इलाज पर बेहद प्रसन्नता जाहिर कर आभार जताया
-होम्योपैथी में हर मर्ज का सफल इलाज है संभव, धैर्य रखने की जरूरत : डॉक्टर
-फिजिशियन ने बताया-स्टोन होने पर उल्टी, ठंड लगना और बुखार जैसे लक्षण
Jagrat Times, कानपुर : जीवन में व्यस्तता के कारण अक्सर लोग खानपान में गड़बड़ी कर देते है। नियमित संतुलित भोजन नहीं करना, एक्सरसाइज व योग न करना, सुबह नहीं टहलने के अलावा प्रदूषण के कारण भी अक्सर किसी न किसी बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं। ऐसी ही आम बीमारियों में से एक है स्टोन या पथरी होना। यदि किसी को भी स्टोन यानी पथरी की शिकायत हो जाती है तो बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है। इसका होम्योपैथिक विधा में कारगर और सफल इलाज है। और आपको कही भटकने की भी जरूरत नहीं है क्योंकि कानपुर व आसपास जिलों में मशहूर सीनियर होम्योपैथिक फिजिशियन डॉक्टर मधुलिका शुक्ला अपने अद्भुत इलाज के तरीके से इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए चर्चित है। स्टोन यानी पथरी के विषय में विस्तार से चर्चा करते हुए डाॅक्टर मधुलिका शुक्ला ने बताया कि मेरे पास सितंबर के महीने में राजन मिश्रा आए थे जिनकी किडनी में 35 मिमी की पथरी थी।

इधर-उधर काफी इलाज कराने के बाद भी जब उन्हें आराम नहीं मिला तो उनको एक सज्जन ने मेरे पास इलाज करने की महत्वपूर्ण सलाह दी। सितंबर के महीने से मुझसे से इलाज कराना शुरू किया था और अब नाममात्र स्टोन बचा है। होम्योपैथी और डॉक्टर मधुलिका शुक्ला को बेहद धन्यवाद और आभार देते हुए मरीज राजन मिश्रा ने कहा कि मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा है कि मेरी पथरी नाममात्र रह गई है। वास्तव में होम्योपैथी और डॉक्टर मधुलिका शुक्ला का कोई जवाब नहीं है। उन्होंने साबित कर दिया डॉक्टर धरती के भगवान होते हैे। वहीं, डॉक्टर मधुलिका शुक्ला ने कहा कि होम्योपैथी में बड़े से बड़े मर्ज का आसानी से सफल इलाज संभव होता है, बस थोड़ा विश्वास और धैर्य रखने की जरूरत है। इधर-उधर भटकने से बीमारी और बढ़ जाती है। होम्योपैथिक इलाज के बाद बीमारी दोबारा उभर कर नहीं आती है।
स्टोन यानी पथरी शरीर के अंदर बनने वाले कठोर पत्थर जैसे जमाव होते हैं
डॉक्टर मधुलिका शुक्ला ने बताया कि स्टोन यानी पथरी शरीर के अंदर बनने वाले कठोर, पत्थर जैसे जमाव होते हैं, जो किडनी, पित्ताशय, लार ग्रंथियों या अन्य अंगों में बन सकते हैं, और खनिजों और लवणों के जमने से बनते हैं। गुर्दे की पथरी सबसे आम है, जो मूत्र में कैल्शियम, ऑक्सालेट और यूरिक एसिड जैसे तत्वों से बनती है और छोटे होने पर पेशाब के साथ निकल सकती है, लेकिन बड़े होने पर तेज दर्द और अन्य समस्याएं पैदा कर सकती है, जिसके इलाज के लिए पानी पीना, आहार बदलना या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। पथरी एक ठोस, क्रिस्टल जैसा पदार्थ है जो शरीर के विभिन्न हिस्सों में बन सकता है, खासकर किडनी में। यह तब बनती है जब मूत्र या पित्त में कुछ रसायन (जैसे कैल्शियम, ऑक्सालेट, यूरिक एसिड) बहुत ज्यादा हो जाते हैं और क्रिस्टल के रूप में जमने लगते हैं।
ज्यादा प्रोटीन खाने या गाउट होने पर बनते हैं यूरिक एसिड स्टोन
डॉक्टर मधुलिका शुक्ला ने पथरी या स्टोन के होने कारणों पर चर्चा करते हुए बताया कि कैल्शियम स्टोन सबसे आम, कैल्शियम ऑक्सालेट या कैल्शियम फॉस्फेट से बनते हैं। यूरिक एसिड स्टोन ज्यादा प्रोटीन खाने या गाउट होने पर बनते हैं। स्ट्रुवाइट स्टोन मूत्र मार्ग के संक्रमण के कारण बनते हैं।सिस्टीन स्टोन दुर्लभ, आनुवंशिक स्थिति के कारण बनते हैं। इस बीमारी के लक्षणों पर भी डाॅक्टर मधुलिका शुक्ला ने प्रकाश डालते हुए कहा कि पेट, कमर या साइड में तेज दर्द (पेशाब नली में पथरी खिसकने पर)। पेशाब करते समय जलन या दर्द। बार-बार पेशाब आना या पेशाब रुक-रुक कर आना। पेशाब में खून आना (रंग गहरा या लाल)। मतली और उल्टी, ठंड लगना और बुखार (संक्रमण होने पर), पर्याप्त पानी न पीना, ज़्यादा नमक, चीनी और एनिमल प्रोटीन (मांस, अंडे) खाना। मोटापा, पारिवारिक इतिहास और कुछ बीमारियां (जैसे क्रोहन रोग, गाउट) के कारण यह बीमारी हो सकती है।
खूब पानी पीजिए, नमक व एनिमल प्रोटीन का कम सेवन करें
इलाज और रोकथाम की महत्वपूर्ण सलाह देते हुए डॉक्टर मधुलिका शुक्ला ने बताया कि खूब पानी पीना चाहिए। नमक और एनिमल प्रोटीन को कम ही खाना चाहिए। ऑक्सालेट युक्त भोजन (पालक, चुकंदर) का भी सीमित प्रयोग करना उचित है। अगर आपको पथरी के लक्षण महसूस हो तो डॉक्टर (यूरोलॉजिस्ट) से संपर्क करें, क्योंकि सही समय पर इलाज होने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।