अनुपमा ‘अनुश्री’ द्वारा रचित हृदय गंगे…पुनः अध्यात्म की ओर का संदेश देती
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अनुपमा ‘अनुश्री’ द्वारा रचित हृदय गंगे…पुनः अध्यात्म की ओर का संदेश देती

अपने लेखन से अनुपमा श्रीवास्तव ‘अनुश्री’ ने किताबों की दुनिया में विशेष पहचान बनाई है तन प्रदूषित ,मन प्रदूषित ,सृष्टि का कण-कण प्रदूषित।शेष जीवन में रहा क्या,हे प्रभो, जो करूँ अर्पित।। Jagrat

अनुश्री की अनमोल पंक्तियां
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अनुश्री की अनमोल पंक्तियां

Jagrat Times, Kanpur / अनुश्री की अनमोल पंक्तियां तुम्हारे ख़याल कीधुरी पर मगनप्रेम की कक्षा में निरन्तरघूमते हुए तुम्हारे गिर्दपरिक्रमा को हीजीवन मानती है वोन्यूटन के सिद्धांत कोझुठलाते हुए पृथ्वीखिंची चली जा