पश्चिम बंगाल की एडवोकेट सुमैया परवीन को मिला “100 Iconic Women of India Award”
- May 12, 2026
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एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए बिना फीस लड़ रहीं कानूनी लड़ाई, मानव तस्करी के खिलाफ भी किया वर्षों तक काम Jagrat Times, Kanpur/ पश्चिम बंगाल की एडवोकेट और
एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए बिना फीस लड़ रहीं कानूनी लड़ाई, मानव तस्करी के खिलाफ भी किया वर्षों तक काम Jagrat Times, Kanpur/ पश्चिम बंगाल की एडवोकेट और
एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए बिना फीस लड़ रहीं कानूनी लड़ाई, मानव तस्करी के खिलाफ भी किया वर्षों तक काम
Jagrat Times, Kanpur/ पश्चिम बंगाल की एडवोकेट और समाजसेविका को हाल ही में प्रतिष्ठित “100 Iconic Women of India Award” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें समाज के प्रति उनकी निस्वार्थ सेवा, महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष और एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए किए जा रहे कानूनी सहयोग के लिए प्रदान किया गया।
सुमैया परवीन एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं के लिए बिना किसी फीस के कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। वह उन महिलाओं की आवाज बनी हैं, जिन्हें अक्सर समाज और सिस्टम दोनों नजरअंदाज कर देते हैं। उनका मानना है कि हर महिला को सम्मान और न्याय पाने का अधिकार है, चाहे उसकी परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों।
सिर्फ यही नहीं, सुमैया ने मानव तस्करी जैसे गंभीर मुद्दे पर भी करीब 3 वर्षों तक काम किया है। उन्होंने कई बेसहारा और मजबूर लड़कियों की मदद की तथा उन्हें सुरक्षित जीवन दिलाने के लिए सामाजिक संगठनों और कानूनी संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य किया।

सुमैया का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। निजी जिंदगी में कई कठिन दौर देखने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। एक समय ऐसा भी आया जब परिवार और समाज दोनों ने उन्हें गलत समझा, लेकिन उन्होंने अपने आत्मविश्वास और शिक्षा के दम पर खुद को साबित किया। कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया कि वह अपनी जिंदगी समाज सेवा और जरूरतमंद महिलाओं की मदद के लिए समर्पित करेंगी।

आज सुमैया परवीन उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो जिंदगी की मुश्किल परिस्थितियों से लड़ रही हैं। उनका कहना है कि समाज में बदलाव तभी आएगा, जब महिलाएं एक-दूसरे का सहारा बनें और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं।
“100 Iconic Women of India Award” से सम्मानित होना न केवल सुमैया परवीन के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो अपने संघर्षों के बावजूद आगे बढ़ने का साहस रखती हैं।
इस सम्मान के जरिए देश ने सुमैया परवीन के संघर्ष, साहस और समाज सेवा को सलाम किया है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि मुश्किल हालात इंसान को कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत बना सकते हैं।