-महाराणा प्रताप डेंटल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर एवं माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ दीपिका शुक्ला ने महत्वपूर्ण जानकारियां -प्लाज्मोडियम परजीवियों के कारण और संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छरों द्वारा फैलता है मलेरिया
-महाराणा प्रताप डेंटल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर एवं माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ दीपिका शुक्ला ने महत्वपूर्ण जानकारियां
-प्लाज्मोडियम परजीवियों के कारण और संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छरों द्वारा फैलता है मलेरिया
Jagrat Times, कानपुर : यदि हमें हमेशा स्वस्थ रहना है तो इसके लिए नियमित संतुलित आहार और एक्सरसाइज तो आवश्यक है पर इसके साथ ही साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। स्वच्छता हम सबके सुंदर जीवन के लिए जीवन बहुत ही आवश्यक है। साफ-सफाई में लापरवाही बीमारियों का कारण बन सकती हैं। इन बीमारियों में से एक है मलेरिया। संबंधित बीमारी पर प्रकाश डालते हुए महाराणा प्रताप डेंटल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर एवं माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ दीपिका शुक्ला ने बताया कि मलेरिया एक जानलेवा बीमारी है जो प्लाज्मोडियम परजीवियों के कारण होती है और संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छरों द्वारा फैलती है। मलेरिया को नियंत्रित करने और खत्म करने के वैश्विक प्रयास लगातार जारी है। खासकर भारत जैसे उन देशों में जहाँ यह बीमारी आम है।
मलेरिया के मामलों को कम करने में भारत की महत्वपूर्ण प्रगति
विषय और वैश्विक फोकस हर साल, विश्व स्वास्थ्य संगठन एक विषय (थीम) की घोषणा करता है जो रोकथाम, नवाचार और उन्मूलन की रणनीतियों पर केंद्रित होता है। भारत में मलेरिया की स्थिति भारत ने पिछले एक दशक में मलेरिया के मामलों को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (अब NCVBDC के तहत एकीकृत) जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के माध्यम से, देश 2030 तक मलेरिया को खत्म करने की दिशा में काम कर रहा है। हालाँकि, कुछ क्षेत्रों—विशेष रूप से आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों—को अभी भी जलवायु, स्वच्छता और स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है मलेरिया
मलेरिया प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम और प्लाज्मोडियम विवैक्स जैसे परजीवियों के कारण होता है। यह एक संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है। मनुष्यों के लिए संक्रमण का चरण ‘स्पोरोज़ोइट’ होता है, जबकि मच्छर मानव रक्त से ‘गैमेटोसाइट्स’ को ग्रहण करके संक्रमित होते हैं।
मलेरिया के महत्वपूर्ण लक्षण
सामान्य लक्षणों में शामिल हैं।ठंड लगने के साथ बुखार आना।पसीना आना,सिरदर्द, जी मिचलाना और उल्टी के साथ ही बहुत थकान होना।यदि इलाज न किया जाए, तो मलेरिया गंभीर और जानलेवा हो सकता है।
कैसे करें रोकथाम
भारत की मलेरिया नियंत्रण रणनीति इन बातों पर केंद्रित है। कीटनाशक-उपचारित मच्छरदानी (ITNs) का उपयोग करना घरों के अंदर कीटनाशक का छिड़काव (IRS) करना। रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDTs) का उपयोग करके शीघ्र निदान करना। मलेरिया-रोधी दवाओं के साथ ही समय पर इलाज जन जागरूकता और स्वच्छता समुदाय और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भूमिका एवं सामुदायिक भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आशा (ASHA) कर्मी और स्थानीय अधिकारी ग्रामीण और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में निगरानी, शीघ्र पहचान और जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस बीमारी से लड़ाई में यद्यपि प्रगति हुई है, फिर भी मलेरिया को पूरी तरह से खत्म करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है। मजबूत नीतियों, जन सहयोग और स्वास्थ्य देखभाल में सुधार के साथ, भारत धीरे-धीरे मलेरिया-मुक्त भविष्य की ओर बढ़ रहा है।