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होम्योपैथिक दवाओं को बहुत अधिक तनु (dilute) करके बनाया जाता है : डॉ. मेनका

  • January 20, 2026
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-शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक रोगों में भी होम्योपैथिक दवा बहुत कारगर-गुर्दे की पथरी और बवासीर के इलाज के लिए भी होम्योपैथिक दवा बहुत उपयोगी Jagrat Times, कानपुर :

होम्योपैथिक दवाओं को बहुत अधिक तनु (dilute) करके बनाया जाता है : डॉ. मेनका

-शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक रोगों में भी होम्योपैथिक दवा बहुत कारगर
-गुर्दे की पथरी और बवासीर के इलाज के लिए भी होम्योपैथिक दवा बहुत उपयोगी

Jagrat Times, कानपुर : होम्योपैथी का उपयोग विभिन्न बीमारियों और लक्षणों के लिए किया जाता है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता को वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं किया गया है और इसे पारंपरिक चिकित्सा के विकल्प या पूरक के रूप में उपयोग किया जाता है। जैसे एलर्जी, श्वसन, पाचन संबंधी समस्याओं, और दर्द जैसी विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों के उपचार के लिए किया जाता है। होम्योपैथी इस सिद्धांत पर आधारित है कि किसी पदार्थ की बहुत कम खुराक किसी स्वस्थ व्यक्ति में समान लक्षण उत्पन्न कर सकती है, तो वह खुराक किसी बीमार व्यक्ति के समान लक्षणों का इलाज कर सकती है।

मशहूर सीनियर होम्योपैथिक फिजिशियन डॉ. मेनका ने बताया कि होम्योपैथिक दवाओं का विभिन्न रोगों में किया जाता है जैसे एलर्जी, श्वसन संबंधी लक्षण, पाचन संबंधी समस्याएं और मस्कुलोस्केलेटल (मांसपेशी और कंकाल) दर्द जैसी स्थितियों के लिए होम्योपैथी का उपयोग किया जाता है। शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक में भी यह बहुत कारगर है। शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक लक्षणों को ठीक करने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता हैं। शल्य चिकित्सा संबंधी इलाज में भी इसका प्रचलन है । होम्योपैथी को कुछ शल्य-चिकित्सीय रोग जैसे गुर्दे की पथरी और बवासीर के इलाज के लिए भी उपयोग कर बीमारी को दूर किया जाता है। होम्योपैथी शल्य चिकित्सा और प्रसव के बाद ठीक होने की प्रक्रिया को तेज कर सकती है। होम्योपैथिक दवाओं पर विस्तृत चर्चा करते हुए डॉक्टर मेनका ने बताया कि अत्यधिक तनुकरण का उपयोग किया जाता है यानी होम्योपैथिक दवाओं को बहुत अधिक तनु (dilute) करके बनाया जाता है, जिससे अंत में मूल पदार्थ बहुत कम मात्रा में बचता है। प्लेसबो का भी प्रभाव: आलोचकों का कहना है कि होम्योपैथी से मिलने वाले किसी भी सकारात्मक परिणाम का कारण प्लेसबो प्रभाव हो सकता है। चिकित्सा की पारंपरिक विधियों के साथ ही दवा का सेवन करें और ध्यान रखें कि अपने डॉक्टरों की सलाह के बिना पारंपरिक दवाओं को कभी भी लेना बंद न करें।

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