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सर्दी-खांसी में टेंंशन लेने की बजाय होम्योपैथिक दवा लेनी चाहिए : डॉक्टर मधुलिका शुक्ला

  • January 18, 2026
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-होम्योपैथिक दवा गले की जलन शांत करने, कफ पतला करने और बलगम निकालने में मदद करती है-होम्योपैथिक दवा से हमारे शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) को

सर्दी-खांसी में टेंंशन लेने की बजाय होम्योपैथिक दवा लेनी चाहिए : डॉक्टर मधुलिका शुक्ला

-होम्योपैथिक दवा गले की जलन शांत करने, कफ पतला करने और बलगम निकालने में मदद करती है
-होम्योपैथिक दवा से हमारे शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) को मजबूत करती है

Jagrat Times, Kanpur/ सर्दी-खांसी में होम्योपैथी व्यक्तिगत लक्षणों के आधार पर काम करती है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर और लक्षणों के मूल कारण को ठीक करके राहत देती है, जिससे बार-बार होने वाली समस्याएं कम हो सकती हैं, और यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए सुरक्षित मानी जाती है, क्योंकि यह प्राकृतिक और संयोजन दवाओं के ज़रिए काम करती है। इस बीमारी पर विस्तार से चर्चा करते हुए कानपुर और आसपास जिलों में मशहूर सीनियर होम्योपैथिक फिजिशियन डॉक्टर मधुलिका शुक्ला ने महत्वपूर्ण सलाह देते हुए कहा कि हमेशा किसी योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक से सलाह लें, क्योंकि सही दवा व्यक्ति के समग्र लक्षणों और स्थिति पर निर्भर करती है। बिना किसी चिकित्सीय सलाह के खुद से कभी भी दवा नहीं लेनी चाहिए। खासकर यदि लक्षण गंभीर हों या दवा लेने के 24 घंटे में आराम न मिले।

डॉक्टर मधुलिका शुक्ला ने बताया कि होम्योपैथी हर व्यक्ति के लक्षणों (जैसे नाक बहना, खांसी का प्रकार, सीने में जकड़न) के अनुसार दवा चुनती है, न कि सिर्फ बीमारी के नाम पर। यह सीधे लक्षणों को दबाने के बजाय शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) को मजबूत करती है, जिससे भविष्य में सर्दी-खांसी की प्रवृत्ति कम होती है। यह प्राकृतिक पदार्थों से बनी होती है और आमतौर पर नींद न आने जैसे दुष्प्रभाव नहीं देती, जिससे यह बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित है। सर्दी-खांसी में होने वाले शारीरिक लक्षणों के विषय में जानकारी देते हुए डॉक्टर मधुलिका शुक्ला ने बताया कि होम्योपैथिक दवा गले की जलन शांत करने, कफ पतला करने और बलगम निकालने में मदद करती है, जिससे आराम मिलता है। जब पानी जैसा नाक बहता है और आँखें लाल व पानीदार हों। अचानक तेज बुखार, गले में खराश और लालिमा के लिए।ठंडी हवा से शुरू हुए संक्रमण, गले में दर्द और पस (मवाद) जैसी स्थिति के लिए। छाती में जलन के साथ सूखी खांसी और भारी आवाज के लिए। सफेद या भूरे बलगम वाली सर्दी और बंद नाक के लिए होम्योपैथिक दवा कारगर है। डॉक्टर मधुलिका शुक्ला ने और गहराई से जानकारी साझा करते हुए कहा कि होम्योपैथी एक कॉम्प्लिमेंट्री मेडिसिन सिस्टम है जो मिलते-जुलते पदार्थ लक्षणों का इलाज करती है और बहुत ज्यादा डाइल्यूशन (पोटेंटाइजेशन) पर आधारित है। यह बहुत ज्यादा डाइल्यूटेड दवाओं का इस्तेमाल करके शरीर की हीलिंग को बढ़ाता है, जिसमें अक्सर पानी होता है और मूल पदार्थ लगभग नहीं होता। होम्योपैथिक दवाएं पौधों, खनिजों या जानवरों के स्रोतों से आती हैं, जिन्हें इतना डाइल्यूट किया जाता है कि अक्सर कोई मूल अणु नहीं बचता।इन्हें तरल, गोलियों या टैबलेट के रूप में मुंह से लिया जाता है, जिन्हें रोगी की मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक स्थिति की समग्र तस्वीर के आधार पर चुना जाता है।

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