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नैट म्यूर, सिरदर्द या माइग्रेन के लिए कारगर है होम्योपैथिक दवा : डॉक्टर मधुलिका

  • January 7, 2026
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सप्ताह में 150 मिनट की एरोबिक, तेज चलना या दौड़ना स्ट्रोक के जोखिम को कम करता है नियमित व्यायाम करने से वजन नियंत्रण, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर

नैट म्यूर, सिरदर्द या माइग्रेन के लिए कारगर है होम्योपैथिक दवा : डॉक्टर मधुलिका

सप्ताह में 150 मिनट की एरोबिक, तेज चलना या दौड़ना स्ट्रोक के जोखिम को कम करता है

नियमित व्यायाम करने से वजन नियंत्रण, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार होता है

सिरदर्द और माइग्रेन के लिए प्राकृतिक उपचार उपयोगी होता है

Jagrat Times, कानपुर : आवश्यकता से अधिक काम करने के साथ ही समय पर संतुलित भोजन नहीं करने से हमारा शरीर कई बीमारियों से ग्रसित होने के संकट में पड़ जाता है। सबसे ज्यादा दिक्कत तब होती है जब इंसान छोटी से छोटी बात पर तनाव लेता है। फलस्वरूप वह नैट म्यूर, सिरदर्द या माइग्रेन जैसी जटिल बीमारियों से ग्रसित हो सकता है। इस गंभीर विषय पर विस्तार से चर्चा करते हुए कानपुर व आसपास जिलों में मशहूर सीनियर होम्योपैथिक फिजिशियन डॉक्टर मधुलिका शुक्ला् ने बताया कि नैट म्यूर, सिरदर्द या माइग्रेन के लिए एक बहुत ही उपयोगी यानी कारगर होम्योपैथिक दवा है, जब आपको फटने जैसा, हथौड़े जैसा दर्द महसूस हो। यह होम्योपैथिक दवा विशेष रूप से तब उपयोगी होती है जब आपको पानी की कमी हो, या आपकी आँखों में तनाव हो या आपकी दृष्टि में गड़बड़ी हो। उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए नमक की मात्रा कम करना आवश्यक है। इन बीमारियों से निजात पाने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए डॉक्टर मधुलिका शुक्ला ने बताया कि नियमित व्यायाम करना बहुत जरूरी है हर बीमारी से मुक्ति पाने के लिए। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की एरोबिक गतिविधि, जैसे तेज चलना, दौड़ना, या साइकिल चलाना, स्ट्रोक के जोखिम को कम कर सकता है। व्यायाम से वजन नियंत्रण, रक्तचाप, और कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार होता है। अगर संतुलित भोजन की बात की जाए तो ब्रेन स्ट्रोक के बाद सेवन के लिए पानी, ओमेगा-3 युक्त फैटी फिश (सैल्मन), अलसी, अखरोट, हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ (पालक), फल (जामुन, एवोकाडो, केला), साबुत अनाज और दही जैसे खाद्य पदार्थ अच्छे होते हैं, जो मस्तिष्क के स्वास्थ्य, सूजन कम करने और रिकवरी में मदद करते हैं, जबकि नमक, चीनी और प्रोसेस्ड फ़ूड से बचना चाहिए और डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी है।

डॉक्टर मधुलिका शुक्ला ने और विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि सिरदर्द और माइग्रेन के लिए प्राकृतिक उपचार उपयोगी होता है जैसे खूब सारा सादा पानी पिएं। सेब या गाजर जैसी कोई कुरकुरी चीज खाएं।आराम पाने के लिए सांस लेने के व्यायाम का अभ्यास करें।थोड़ी ताजी हवा लें खींचना। उस जगह की मालिश करें। एक कप पुदीने की चाय पीजिए। लैवेंडर तेल की खुशबू लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि
कई होम्योपैथिक दवाएं हैं जो आपके सिरदर्द या माइग्रेन के इलाज में मदद कर सकती हैं। चाहे आपका सिरदर्द या माइग्रेन तनाव, चिंता या थकान के कारण हो, होम्योपैथिक दवा आपके सिरदर्द या माइग्रेन के इलाज में सहायक हो सकती है। खाने-पीने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताते हुए कहा कि हाइड्रेटेड रहना ज़रूरी है, इसलिए पानी, हर्बल चाय और शोरबा को पीना चाहिए। इसके अलावा खीरा और तरबूज जैसे फल भी अच्छी सेहत के लिए मदद करते हैं। सैल्मन, अखरोट, अलसी और चिया सीड्स दिमाग की सूजन कम करते हैं और न्यूरॉन की मरम्मत करते हैं। पालक जैसी सब्ज़ियाँ पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। जामुन (एंटीऑक्सीडेंट), एवोकाडो (स्वस्थ वसा), केला और संतरे (पोटैशियम)। नट्स और बीज: हृदय और मस्तिष्क के लिए स्वस्थ नाश्ता। फाइबर से भरपूर होते हैं और हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छे हैं। दूध और दही का सेवन स्ट्रोक और हृदय रोगों का जोखिम कम कर सकता है। केला, एवोकाडो, शकरकंद, टमाटर, दूध और दही हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक के खतरे को कम करते हैं। डाॅक्टर मधुलिका ने बताया कि माइग्रेन जैसी बीमारी में यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि क्या चीजें नहीं खानी चाहिए जैसे अल्कोहल और सोडा का सेवन नहीं करना चाहिए।फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड खाने से बचना चाहिए, इनमें अस्वास्थ्यकर वसा और चीनी होती है। ज्यादा नमक खाने से रक्तचाप बढ़ा सकता है। इन सबके अलावा डॉक्टर मधुलिका शुक्ला ने महत्वपूर्ण सलाह देते हुए कहा कि स्ट्रोक के बाद हर व्यक्ति की ज़रूरतें अलग होती हैं, इसलिए डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से सलाह ज़रूर लें। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा शुरू न करें; स्थिति बिगड़ सकती है। स्ट्रोक से उबरने के लिए संतुलित, पौष्टिक और हाइड्रेटेड आहार ज़रूरी है, जिसमें प्राकृतिक खाद्य पदार्थों पर जोर दिया जाए और अस्वस्थ वसा व चीनी से बचा जाए।

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