इम्यूनोलॉजी यह अध्ययन करती है कि ये सूक्ष्मजीव शरीर को कैसे संक्रमित करते हैं : डॉ. दीपिका
December 29, 2025
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-माइक्रोबायोलॉजी की उपयोगिता पर महाराणा प्रताप डेंटल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ दीपिका शुक्ला ने विशेष चर्चा की -इस तकनीकी के माध्यम से हमें संक्रमणों से बचाव या
-माइक्रोबायोलॉजी की उपयोगिता पर महाराणा प्रताप डेंटल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ दीपिका शुक्ला ने विशेष चर्चा की
-इस तकनीकी के माध्यम से हमें संक्रमणों से बचाव या उनसे होने वाली बीमारियों को समझने में मदद मिलती है
Jagrat Times, कानपुर: माइक्रोबायोलॉजी का हमारे दैनिक जीवन में बहुत ही उपयोग है। इसके उपयोग से मानव जीवन में कई अहम बदलाव आए हैं। इस विषय पर महाराणा प्रताप डेंटल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपिका शुक्ला ने बताया कि माइक्रोबायोलॉजी (सूक्ष्म जीव विज्ञान) में इम्यूनोलॉजी (प्रतिरक्षा विज्ञान) का मतलब है कि कैसे हमारा शरीर सूक्ष्मजीवों (जैसे बैक्टीरिया, वायरस, कवक) से लड़ने के लिए अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली का उपयोग करता है, जिसमें जन्मजात और अर्जित प्रतिरक्षा, एंटीजन-एंटीबॉडी प्रतिक्रियाएं, श्वेत रक्त कोशिकाएं और प्रतिरक्षा प्रणाली के विकार जैसे स्वप्रतिरक्षी रोग शामिल हैं, जो हमें संक्रमण और बीमारियों से बचाने के लिए मिलकर काम करते हैं।
इन खूबियों पर विस्तार से चर्चा करते हुए डॉ. दीपिका शुक्ला ने बताया कि शरीर की रक्षा प्रणाली जो हानिकारक सूक्ष्मजीवों (रोगजनकों) और विदेशी पदार्थों (एंटीजन) को पहचानती और नष्ट करती है। रोगाणुओं से लड़ने और स्वस्थ रहने की क्षमता। बाहरी पदार्थ जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को ट्रिगर करते हैं (जैसे वायरस, बैक्टीरिया)। प्रतिरक्षा कोशिकाओं (B-कोशिकाएं) द्वारा बनाए गए प्रोटीन, जो एंटीजन से जुड़कर उन्हें निष्क्रिय करते हैं। प्रतिरक्षा प्रणाली की मुख्य कोशिकाएँ जो रोगाणुओं को नष्ट करती हैं। इस विषय में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि माइक्रोबायोलॉजी सूक्ष्मजीवों का अध्ययन है, और इम्यूनोलॉजी यह अध्ययन करती है कि ये सूक्ष्मजीव शरीर को कैसे संक्रमित करते हैं और शरीर उनसे कैसे लड़ता है। इस तकनीकी के माध्यम से यह देखा जाता है कि बैक्टीरिया या वायरस कैसे प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करते हैं (जैसे एड्स) या जब प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपने ही शरीर पर हमला करती है (जैसे स्वप्रतिरक्षी रोग)। अगर इसके महत्व पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि संक्रामक रोगों (जैसे फ्लू, टीबी) को समझना और उनका इलाज करना। टीकाकरण (Vaccination) विकसित करना (जो प्रतिरक्षा प्रणाली को रोगाणुओं से परिचित कराता है। एलर्जी और स्वप्रतिरक्षी रोगों (जैसे ल्यूपस, रूमेटोइड गठिया) का निदान और उपचार। संक्षेप में, यह अध्ययन करता है कि सूक्ष्मजीव और हमारा शरीर कैसे परस्पर क्रिया करते हैं, जिससे हमें संक्रमणों से बचाव या उनसे होने वाली बीमारियों को समझने में मदद मिलती है।