कैंसर सर्वाइवर और ट्रिपल नेगटिव की लेखिका आरती पाठक ने CII कार्यक्रम में साझी “पोस्ट-ट्रॉमैटिक जॉय” की अनोखी अवधारणा
December 18, 2025
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“परिवार, आयुर्वेद और प्राणायाम ने मुझे दुबारा जीना सिखाया” — आरती मुंबई: कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्री – इंडियन विमेन नेटवर्क (CII IWN), महाराष्ट्र द्वारा आयोजित 7th She Matters—महिलाओं
“परिवार, आयुर्वेद और प्राणायाम ने मुझे दुबारा जीना सिखाया” — आरती मुंबई: कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्री – इंडियन विमेन नेटवर्क (CII IWN), महाराष्ट्र द्वारा आयोजित 7th She Matters—महिलाओं के स्वास्थ्य पर केंद्रित प्रमुख वार्षिक कार्यक्रम—में ट्रिपल नेगटिव पुस्तक की लेखिका और कैंसर सर्वाइवर आरती पाठक ने एक अत्यंत भावुक और आत्मिक संबोधन दिया। उन्होंने न केवल कैंसर जैसी बीमारी के शारीरिक कष्टों पर, बल्कि उससे जुड़े अदृश्य भावनात्मक बोझ पर भी खुलकर बात की। इसी क्रम में उन्होंने “पोस्ट-ट्रॉमैटिक जॉय”—अर्थात कठिनाइयों के बाद केवल जीवित रहना ही नहीं, बल्कि सुख और आनंद को पुनः पाना—की अपनी अनूठी अवधारणा को सामने रखा। इस सत्र का शीर्षक था: “Women Survivors & Supporters of Cancer – Hidden Cost” (कैंसर से जीती महिलाएं और कैंसर पीढ़ितों के समर्थकों की छिपी हुई लागत)। इस सत्र का संचालन गौरी पाठक ने किया, और पैनल में प्रिय दत्त (चेयरपर्सन व ट्रस्टी, नार्गिस दत्त फ़ाउंडेशन), डॉ. मंज़र शेख (स्त्रीरोग विशेषज्ञ) और डॉ. संगीता पंडित (HOD– फाइनैन्स, सीडेनहम इंस्टिट्यूट ऑफ मैनिज्मन्ट स्टडीस) भी शामिल थीं।
माँ के निधन के कुछ ही घंटों बाद कैंसर का पता
एक प्रश्न के उत्तर में आरती पाठक ने अपनी व्यक्तिगत यात्रा को अत्यंत सत्यता से बताया। आरती पाठक ने बताया कि 2021 में उनकी माँ का कोविड के कारण निधन हुआ था। कुछ ही घंटों बाद उन्हें यह पता चला कि उन्हें स्तन कैंसर है। कैंसर का प्रकार अत्यंत आक्रामक था, जिसके कारण कई महीनों तक तीव्र उपचार—रसायन चिकित्सा, सर्जरी और विकिरण—चलता रहा। वह कहती हैं, “यह ऐसा लगता था मानो शरीर, मन और आत्मा—तीनों पर एक निरंतर प्रहार हो रहा है। कई बार लगता था कि इतना दर्द सहकर जीने का उद्देश्य ही क्या है?” परिवार, आयुर्वेद और प्राणायाम: तीन स्तंभ जिन्होंने उन्हें थामा उस अत्यधिक कठिन समय में उन्हें सबसे बड़ा संबल मिला—परिवार के प्रेम और देखभाल का। साथ ही, आयुर्वेद ने कीमोथेरैपी के दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया। परंतु उनकी दृष्टि और मन पर सबसे अधिक प्रभाव प्राणायाम का पड़ा। “प्राणायाम ने मुझे ईश्वर का अनुभव कराया—एकत्व का, आत्मा की यात्रा का। उस क्षण के बाद मृत्यु मुझे डरा न सकी,” उन्होंने कहा। यह अनुभव उनके भीतर एक गहन शांति लेकर आया और उनका पूरा जीवन-दृष्टिकोण परिवर्तित हो गया।
जर्नल से बनी किताब उपचार के दिनों में लिखे गए उनके निजी जर्नल बाद में विकसित होकर उनकी पुस्तक ट्रिपल नेगटिव अ तले ऑफ लव फैथ एण्ड सरेन्डर बन गए—एक ऐसा संस्मरण जो बीमारी की कड़वी सच्चाइयों, डर, आशा और पुनर्जन्म की उनकी यात्रा को बिना किसी आडंबर के प्रस्तुत करता है।
पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस” ही एकमात्र परिणाम नहीं कार्यक्रम में आरती पाठक ने कहा, “हम अक्सर मान लेते हैं कि किसी गहरे आघात के बाद जीवन केवल ‘पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस’ से ही परिभाषित होगा। लेकिन यह आवश्यक नहीं है। हम पोस्ट-ट्रॉमैटिक जॉय भी जी सकते हैं—और मैं आज वही जी रही हूँ।” उन्होंने आगे कहा, “अगर सही सहयोग मिले—परिवार का प्रेम और सेवा, स्वास्थ्य विशेषज्ञ द्वारा सही मार्ग दर्शन, मानसिक और आध्यात्मिक सहारा—तो यह संभव है कि कठिन समय के बाद भी जीवन प्रसन्न, सार्थक और पूर्णत: जीया जा सके।” आज, वह मानती हैं कि लोग केवल चिकित्सा उपचार से संतुष्ट नहीं हैं; वे “हीलिंग बियॉन्ड क्योर”—उपचार से आगे की गहरी, आत्मिक और भावनात्मक चंगाई—की तलाश में हैं। और उनकी कहानी इस संभावना का सशक्त प्रमाण है कि संकट के बाद का जीवन केवल अस्तित्व का नहीं, आनंदमय भी हो सकता है।