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कोई घनश्याम से कह दो तुम्हारा यार आया है

  • December 13, 2025
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-कथा के अंतिम दिन भावुक हुए श्रोताबालयोगी अरूणपुरी महाराज भी पहंुचे-समाजसेवी सुशील परिहार ने किया सम्मान-कथावाचक शैलेन्द्रदास जी महाराज से लिया आशीर्वाद-भक्तिमय माहौल में श्रोताओं ने लगाये गोते

कोई घनश्याम से कह दो तुम्हारा यार आया है

-कथा के अंतिम दिन भावुक हुए श्रोता
बालयोगी अरूणपुरी महाराज भी पहंुचे
-समाजसेवी सुशील परिहार ने किया सम्मान
-कथावाचक शैलेन्द्रदास जी महाराज से लिया आशीर्वाद
-भक्तिमय माहौल में श्रोताओं ने लगाये गोते

Jagrat Times, कानपुर। कोई घनश्याम से कह दो तुम्हारा यार आया है यह भजन की पंक्तियां जैसे ही सेन पश्चिम पारा गांव में आयोजित भागवत कथा के अंतिम दिन गंूजी पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।
कथावाचक शैलेन्द्रदास जी महाराज आज भगवान कृष्ण और सुदामा की दोस्ती पर प्रकाश डाल रहे थे। किस तरह पत्नी के कहने पर मुश्किल से सुदामा मित्र से मिलने जाते है और साथ चावल की पोटली रखे होते है। कथा विवरण के दौरान पंडाल में मौजूद सैकड़ों भक्त भाव-विभोर हो गये। इसी दौरान भजन मंडली ने भजन गाकर पूरा पंडाल भक्तिमय कर दिया।

बालयोगी अरूणपुरी भी हुए मंचासीन
सिद्धनाथ घाट के महाराज बालयोगी अरूणपुरी भी कथास्थल सेन पश्चिम पारा पहंुचे। यहां कथा आयोजक सुशील परिहार ने उनको अंगवस्त्र पहनाकर सम्मान किया। भागवत कथा के इस सराहनीय कार्य के लिए बालयोगी ने समाजसेवी सुशील परिहार की तारीफ करते हुए कहा कि यह आयोजन बहुत ही पवित्र है। इस तरह के आयोजनों से समाज व श्रोताओं को जीवन की एक नयी दिशा मिलती है। महाराज ने कहा कि कथा श्रवण से अधिक कोई पवित्र कार्य नहीं है। यही एक रास्ता है जो सभी को सीधा भगवन से जोड़ता है। ईश्वर सभी स्थान पर विराजमान है सिर्फ आपकों पवित्र मन से याद करने की आवश्यकता है।

समाजसेवी सुशील परिहार ने की पूजा अर्चना
कथा के अंतिम दिन जमकर भक्तों की भीड़ उमड़ी। जैसे ही समय बीत रहा था श्रोता गमगीन हो रहे थे। बीते दिनों हुई कथा से पूरा गांव भक्तिमय माहौल में डूब चुका था। अंतिम दिन सुशील परिहार ने परिवार के साथ पूजा अर्चना की। भजनों के बीच पूरा माहौल महाराज की विदाई के कारण नम था। कथा के इस भव्य कार्यक्रम के लिए सभी ग्रामीण समाजसेवी सुशील परिहार का अभिवादन कर रहे थे।

अरूणपुरी महाराज ने की कथावाचक की प्रशंसा
सिद्धनाथ घाट के महंत बालयोगी अरूणपुरी महाराज ने कहा कि प्रयागराज नहाना या फिर भागवत कथा सुनना बराबर है। भागवत कथा का श्रवण भक्त अगर पूरा मन से करता है तो उसे जीवन का सारा सुख प्राप्त होता है। मंचासीन अरूणपुरी महाराज ने कहा कि भगवान सभी स्थान पर विराजमान है। आवश्यकता है सिर्फ उन्हें मन से याद करने की। द्रोपति पर किस्सा सुनाते हुए महाराज ने कहा कि चीरहरण के समय द्रौपति ने सभी को याद किया लेकिन सबसे आखिर में भगवान कृष्ण का स्मरण किया। इसके बाद भगवान ने कैसे सहायता की यह जगजाहिर है। महाराज ने कथावाचक शैलेन्द्रदास जी महाराज के व्यक्तिव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कथा को शब्दों पिरोकर सुनाना यह सिर्फ भगवान की कृपा से संभव है। यह कृपा भगवान से कथावाचक शैलेन्द्रदासजी को प्राप्त है। उन्होंने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि हम आज इस मंच पर साथ हैं

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