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एक ऐसा राजा जो मिट्टी से जुड़ा रहा

  • December 5, 2025
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World Soil Day -‘किसानों का मसीहा’ कहलाया–भूमिबोल ने लोगो को समझाया माटी का मोल -2002 में इंटरनेशनल सॉइल एसोशिएसन ने वर्ड सॉएल डे मनाने की सिफारिश की मर्जिया

एक ऐसा राजा जो मिट्टी से जुड़ा रहा

World Soil Day

-‘किसानों का मसीहा’ कहलाया
भूमिबोल ने लोगो को समझाया माटी का मोल

-2002 में इंटरनेशनल सॉइल एसोशिएसन ने वर्ड सॉएल डे मनाने की सिफारिश की

मर्जिया जाफर, नोएडा / World Soil Day यानि ‘विश्व मृदा दिवस’ जो हर साल 5 दिसंबर को मनाया जाता है। आप सोच रहे होंगे की मृदा क्या होता है। दरअसल आम बोली में मिट्टी को ही मृदा कहते हैं। ‘विश्व मृदा दिवस’ मनाने का उद्देश्य लोगों को मिट्टी से जोड़ना है।
हम भारतीयों के लिए मिट्टी देश प्रेम से ताल्लुक रखती है। वहीं, मिट्टी को हम धरती मां भी कहते हैं जिसकी झलक हमें यहां के पारंपरिक लोकगीतों के साथ बॉलिवुड फिल्मों के गाने में भी दिखती है।
जाहिर है मिट्टी जीवन के लिए एक जरूरी प्राकृतिक संपदा है, जिसकी बर्बादी का असर हर किसी के जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। इस वजह से ही मिट्टी संरक्षण और इसके टिकाऊ प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल विश्व मृदा दिवस मनाया जाता है।

मिट्टी का प्रदूषण भी गंभीर पर्यावरणीय समस्या है, जिसमें मिट्टी की क्वालिटी में गिरावट आती है। मिट्टी इंसानों और सभी तरह के जीवों के लिए एक एडवांस सोर्स है। लेकिन industries के लिए पर्यावरण मानकों के प्रति लापरवाही और कृषि भूमि के मिसमनेजमेंट से मिट्टी की क्वालीटी खराब होती है।
आइए जानते वर्ड सॉएल डे मनाने की शुरुआत कब और क्यों हुई। 2002 में इंटरनेशनल सॉइल एसोशिएसन ने वर्ड सॉएल डे मनाने की सिफारिश की। FAO सम्मेलन ने 20 दिसंबर 2013 में 68वें संयुक्त राष्ट्र महासभा में इसे मनाने की आधिकारिक घोषणा की।
अब आप सोचेगे कि 5 दिसंबर को ही वर्ल्ड सॉइल डे क्यों मनाया जाता है…इसके पिछे भी एक कहानी है। एक ऐसे राजा की कहानी है जिसने माटी के मोल को खुद तो समझा ही साथ ही दूसरों को भी समझाया। और वो हैं थाईलैंड के महाराजा एच.एम भूमिबोल अदुल्यादेज जिसने उपजाऊ मिट्टी के बचाव के लिए काफी काम किया था। उनके इसी योगदान को देखते हुए हर साल उनके जन्मदिन को विश्व मिट्टी दिवस के रूप में समर्पित करते हुए उन्हें सम्मानित किया गया।
मिट्टी हमारे जीवन में अहम है जो सभी जीवों के लिए महत्व रखती है। मिट्टी खनिज, भोजन और जीवन के लिए जरूरी चीजें प्रदान करती है। लेकिन कार्बनिक पदार्थ मिट्टी को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे soil fertility में गिरावट आती है।
भूमिबोल ने सॉइल फर्टिलिटी सुधारने के लिए 70 सालों तक थाइलैंड में अपने शासनकाल के दौरान हर गरीब से लेकर किसान तक से मिलते थे और उनकी समस्याओं को सुलझाते थे। उनकी जिंदगी को सुधारने और खेती को नए आयाम देने के लिए भूमिबोल ने 4 हजार प्रॉजेक्ट्स की शुरुआत की। इन सभी योजनाओं का मुख्य केंद्र मिट्टी ही थी। उन्होंने मिट्टी की क्वालिटी को सुधारने के लिए वेटिवर ग्रास का इस्तेमाल शुरू किया, जिसके लिए उन्हें इंटरनैशनल इरोज़न कंट्रोल असोसिएशन की तरफ से इंटरनैशनल मैरिट अवॉर्ड से नवाजा गया। यह एक ऐसी घास है जो मिट्टी के कटाव ‍को रोकने में असरदार है। यही नहीं, ऐसिडिक सॉइल को ट्रीट करने के लिए भूमिबोल ने “Klaeng Din” or “Tricking the Soil” Project,की शुरुआत भी की।
भूमिबोल को ‘किसानों का मसीहा’ कहा जाए तो गलत नहीं होगा। उन्होंने कई गावों की यात्राएं कीं और किसानों के बीच बैठकर ऐसी-ऐसी समस्याओं का हल किया, जो नमुमकिन थीं। थाइलैंड के किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या थी मिट्टी । भूमिबोल के सामने यह समस्या तब सामने आई जब वह 1983 में पेच्चाबुरी प्रांत में हुआसाई समुदाय गए। वहां उन्होंने एक पुराना वन रिजर्व देखा, जिसकी जमीन सूखी और बंजर थी। उस जगह को देख उन्होंने तभी कह दिया था कि यह जगह जल्द ही रेगिस्तान बन जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी देखा कि कुछ किसान लालच के चक्कर में पर्यावरण के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। बस यहीं से भूमिबोल अपने कार्य में जुट गए। उन्होंने मिट्टी की समस्या पर ‘Sufficiency Economy Philosphy’ नाम की किताब भी लिखी, जो मार्केट आते ही छा गई और लोगों को मिट्टी के मोल को समझने और उसके बचाव को रोकने के लिए प्रेरित किया। उनके इसी योगदान के चलते उन्हें 2012 में इंटरनैशनल यूनियन ऑफ सॉइल सांइस की तरफ से पहले ह्यूमैनिटेरियन सॉइल साइंटिस्ट का अवॉर्ड मिला।

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