नई बीमारियों की चुनौतियों से मुझे अनुभवी बनने में मदद मिली : डॉ. मधुलिका शुक्ला
- December 2, 2025
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-अपने अनुभव, निस्वार्थ भाव और दिन-रात समर्पण की भावना से हर कीमत पर मरीज को स्वस्थ करना जीवन का उद्देश्य -किसी भी पुरस्कार, अवार्ड और ट्राफी से बढ़कर
-अपने अनुभव, निस्वार्थ भाव और दिन-रात समर्पण की भावना से हर कीमत पर मरीज को स्वस्थ करना जीवन का उद्देश्य
-किसी भी पुरस्कार, अवार्ड और ट्राफी से बढ़कर है मरीज के चेहरे पर मुस्कान लाना, यह काम बहुत ही अनमोल होता है
Jagrat Times, Kanpur/ होम्योपैथिक उपचार में रोज नए आयाम लिख रहीं कानपुर के साथ ही आसपास जिलों में अत्यंत मशहूर सीनियर होम्योपैथिक फिजिशियन डॉक्टर मधुलिका शुक्ला ने समाज में मिसाल पेश की है। विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि
हमारे जीवन में शिक्षक और चिकित्सक का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। एक शिक्षक अपने ज्ञान से भविष्य की नींव रखता है तो वहीं दूसरी ओर एक डॉक्टर बीमारी से बचाकर जीवन को सुरक्षित करता है। इस लिहाज से एक डॉक्टर का स्थान जीवन और समाज में सबसे ऊंचा होता है क्योंकि जब तक हम पूरी तरह से स्वस्थ नहीं होगे तब तक कोई भी सफलता हासिल नहीं कर सकते। इस विषय पर विस्तार से चर्चा करते हुए कानपुर व आसपास जिलों में मशहूर सीनियर होम्योपैथिक डॉक्टर मधुलिका शुक्ला ने बताया कि मेडिकल जगत में अपने हुनर और अद्भुत इलाज करने के तरीकों की बदौलत पुरस्कार, अवार्ड और ट्राफी जीती है। नई-नई बीमारियों की चुनौतियों से मुझे अनुभवी होने के साथ ही अपने हुनर को परखने का मौका मिला और मैंने हर कीमत पर मरीज को स्वस्थ करने के कड़ी मेहनत की।
अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि कॅरियर की शुरुआत में मुझे भी बहुत संघर्ष करना पड़ा लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। संघर्ष के दिनों में मेरे पिता ने मुझे बहुत महत्वपूर्ण सलाह दी थी कि कभी भी कठिनाइयों से हार मानकर अपना फैसला नहीं बदला और आज मेहनत रंग लाई।

आज कानपुर शहर ही नहीं आसपास के कई जिलों में लोग मुझे बहुत अच्छी तरह जानते हैं और मेरे इलाज से पूरी तरह स्वस्थ होकर मुझे शुभकामनाएं और आशीर्वाद देते हैं। अपने मन की बात साझा करते हुए डॉक्टर मधुलिका शुक्ला ने कहा कि मेरे इलाज के बाद पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद उनके चेहरे पर जो मुस्कान आती है वो किसी भी पुरस्कार, अवार्ड और ट्राफी से बढ़कर है क्योंकि किसी चेहरे पर मुस्कान लाने का काम बहुत ही अनमोल होता है। डॉक्टर को धरती का भगवान कहा जाता है क्योंकि वह अपने अनुभव, निस्वार्थ भाव और दिन-रात समर्पण की भावना से हर कीमत पर मरीज की जान बचाता है।
होम्योपैथिक विधा और दवाओं की खूबियों पर चर्चा करते हुए डॉक्टर मधुलिका शुक्ला ने बताया कि होम्योपैथिक दवा का उपयोग एलर्जी, श्वसन, पाचन संबंधी समस्याओं, और दर्द जैसी विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों के उपचार के लिए किया जाता है। होम्योपैथी इस सिद्धांत पर आधारित है कि किसी पदार्थ की बहुत कम खुराक किसी स्वस्थ व्यक्ति में समान लक्षण उत्पन्न कर सकती है, तो वह खुराक किसी बीमार व्यक्ति के समान लक्षणों का इलाज कर सकती है। उन्होंने बताया कि विभिन्न रोग जैसे एलर्जी, श्वसन संबंधी लक्षण, पाचन संबंधी समस्याएं और मस्कुलोस्केलेटल (मांसपेशी और कंकाल) दर्द जैसी स्थितियों के लिए होम्योपैथी का उपयोग रामबाण है। शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक लक्षणों को ठीक करने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है। होम्योपैथी को कुछ शल्य जैसे चिकित्सीय रोगों, जैसे कि गुर्दे की पथरी और बवासीर को भी आसानी से ठीक किया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि होम्योपैथी शल्य चिकित्सा और प्रसव के बाद ठीक होने की प्रक्रिया को तेज कर सकती है। खास बात यह है कि होम्योपैथिक दवाओं को बहुत अधिक तनु (dilute) करके बनाया जाता है, जिससे अंत में मूल पदार्थ बहुत कम मात्रा में बचता है।