बैंकॉक में डॉ. नरेश त्रेहन ने डॉ0 मधुलिका और प्रो0 दीपिका को कियाअंतरराष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित
November 29, 2025
0
-होम्योपैथिक जगत में अद्भुत इलाज के लिए डॉक्टर मधुलिका शुक्ला को हेल्थ केयर एंड वेलनेस और शिक्षा जगत में अहम योगदान के लिए प्रोफेसर डॉ.दीपिका शुक्ला को मिला
-होम्योपैथिक जगत में अद्भुत इलाज के लिए डॉक्टर मधुलिका शुक्ला को हेल्थ केयर एंड वेलनेस और शिक्षा जगत में अहम योगदान के लिए प्रोफेसर डॉ.दीपिका शुक्ला को मिला पुरस्कार
-डॉ. नरेश त्रेहन प्रसिद्ध हृदय शल्य चिकित्सक और मेदांता – द मेडिसिटी के संस्थापक, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं
-अपनी शानदार उपलब्धियों के लिए दोनों बहनों ने अपने पूरे परिवार खासतौर माता-पिता और भाई को दिया श्रेय
-डॉक्टर मधुलिका ने कहा कि डॉक्टर नरेश त्रेहन ने भी इलाज में होम्योपैथिक की महत्वपूर्ण भूमिका पर मुहर लगाते हुए मुझमें और आम जनता में विश्वास जगाया
Jagrat Times, कानपुर : लगातार सफलता के नए आयाम लिख रहीं कानपुर की मशहूर सीनियर होम्योपैथिक फिजीशियन डॉक्टर मधुलिका शुक्ला ने रविवार को एक और अद्भुत उपलब्धि अपने नाम कर ली। होम्योपैथिक के क्षेत्र में अद्भुत इलाज करने के लिए डॉक्टर मधुलिका शुक्ला को प्रसिद्ध हृदय शल्य चिकित्सक और मेदांता – द मेडिसिटी के संस्थापक, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. नरेश त्रेहन ने रविवार को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय हेल्थ केयर एंड वेलनेस अवार्ड से सम्मानित किया। डॉ. नरेश त्रेहन 40 से अधिक वर्षों के अनुभव के साथ, उन्हें भारत के सबसे सफल हृदय शल्य चिकित्सकों में से एक माना जाता है और उन्होंने 48,000 से अधिक हृदय शल्यक्रियाएं की हैं। उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और कई अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।
इतना ही नहीं उनकी बहन व महाराणा प्रताप डेंटल कालेज में माइक्रोबायोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपिका शुक्ला को भी इस इवेंट में अंतरराष्ट्रीय अवार्ड से पुरस्कृत किया गया। अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतने के बाद डॉक्टर मधुलिका शुक्ला और प्रोफेसर डॉ. दीपिका शुक्ला ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने पूरे परिवार सहित माता-पिता और भाई को दिया। विशेष बातचीत में डॉक्टर मधुलिका शुक्ला ने बताया कि शुरुआती दिनों मैंने बहुत संघर्ष किया। जब मैं अपना कॅरियर बनाने के लिए संघर्ष कर रही थीं तब मेरे पिता ने महत्वपूर्ण सलाह देते हुए कहा था कि कठिनाइयों से घबराकर कभी तुम हार नहीं मानना। आज उनकी महत्वपूर्ण सलाह के साथ दिन और रात कड़ी मेहनत और लगन का ही परिणाम है कि मुझे इतनी बड़ी उपलब्धि मिली है। वहीं प्रोफेसर डॉ. दीपिका शुक्ला ने शिक्षा जगत में अपनी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मैंने हमेशा यही प्रयास है कि छात्रों को अधिक से अधिक शिक्षा आसानी से उपलब्ध हो सके। मेरे जीवन का यही उद्देश्य है कि हर जरूरतमंद छात्र को उचित शिक्षा हासिल करने का अवसर मिल सके।
कानपुर के साथ ही आसपास जिलों में मशहूर होने के बाद अब देश ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकीं डॉक्टर मधुलिका ने कहा कि मेरे जीवन का उद्देश्य यही है कि कोई भी मरीज बिना इलाज और दवा के परेशान नहीं होने पाए। मैंने निस्वार्थ भाव से ही सबकी दिन और रात सेवा कर मरीजों की बीमारियों को ठीक किया है। स्वस्थ होने वाले मरीजों और उनके परिवार वालों की शुभकामनाओं, दुआओं और आशीर्वाद का ही नतीजा है कि आज मुझे इतनी बड़ी खुशी मिली है कि मन में नहीं समा रही है। मैंने हमेशा होम्योपैथिक इलाज और दवा का प्रचार-प्रसार किया है। मैंने हमेशा लोगों के भ्रम को दूर किया है कि होम्योपैथिक दवाओं से इलाज कराने में बहुत समय लगता है। होम्योपैथिक दवा से कोई भी बीमारी का जड़ से खत्म हो जाती है और जीवन में कभी भी लौट कर नहीं आता है।