पंडित चन्द्रकान्त शुक्ला से जानिए, कैसे करें तीर्थकाल जिससे पूर्वज हो प्रसन्न
September 7, 2025
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– हिन्दू धर्म में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए समर्पित तीर्थकाल –आरंभ: 7 सितंबर 2025 (भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से शुरू होकर) –समाप्ति: 21 सितंबर 2025 (सर्वपितृ
– हिन्दू धर्म में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए समर्पित तीर्थकाल
–आरंभ: 7 सितंबर 2025 (भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से शुरू होकर)
–समाप्ति: 21 सितंबर 2025 (सर्वपितृ अमावस्या / महालय अमावस्या के साथ समाप्त)
-कारण: यह अवधि लगभग 15–16 दिनों की है, जो श्रीश्राद्ध के रूप में जानी जाती है
– इस बार श्राद्ध कैसे करें – सरल दिशानिर्देश:
ज्योतिषाचार्य पंडित चन्द्रकान्त शुक्ला
मुख्य अनुष्ठान: तर्पण और पिंड़-दान
सुबह स्नान के बाद उत्तर या दक्षिण दिशा की ओर मुख करके काले तिल व जल का तर्पण करें (श्राद्ध के प्रमुख कर्म) ।
पिंड़-दान करें: गेंहू या चावल के मिश्रण से बने पिंडे श्रद्धापूर्वक अर्पित करें ।
दान-पुण्य
भोजन, वस्त्र, छाता, ताम्र पात्र, जूते, और अन्य सामग्री प्रदान करना अति पुण्यदायक माना जाता है ।
गाय, कुत्ते, कौवे, और गरीबों को भोजन या सहायता देना विशेष फलदायी होता है ।
ब्राह्मणों को दक्षिणा अर्पित करें; उनका आशीर्वाद महत्वपूर्ण माना गया है ।
सादगी और पुण्य पर जीवनशैली बनाए रखें
तामसिक वस्तुओं (मांस, शराब, प्याज़-लहसुन) का त्याग करें; सात्विक आहार और जीवनशैली अपनाएं ।
अनुशासन और आत्मशुद्धि पर जोर दें — शांत मिलनसार वातावरण, परिवार के साथ श्रद्धापूर्वक भाव बनाए रखें ।
नियमित स्मरण और परिवार की एकता
पितरों की याद रोज करें; परिवार में सद्भाव बनाए रखें ।
इस अवधि में नए कार्य आरंभ न करें (जैसे व्यापार, यात्रा, नया निवेश आदि) — इसे अशुभ माना जाता है ।
महत्वपूर्ण दिन – सर्वपितृ अमावस्या / महालय अमावस्या
यदि किसी दिन श्राद्ध न हो पाया हो, तो 21 सितंबर 2025 को, सभी पितरों के लिए श्राद्ध अर्पित किया जा सकता है — इसे अत्यंत फलदायी माना जाता है ।
दिशा विवरण
तर्पण व पिंड़-दान जल + काला तिल; चावल-गेहूँ से बने पिंडे
दान-पुण्य भोजन, वस्त्र, छाता-जूते, ताम्र-पात्र, कौवे, गाय, कुत्ते, ब्राह्मण
जीवनशैली सात्विक आहार, शांति व संयम
सिंचित स्मरण रोजाना पितरों को याद व प्रार्थना; वाद-व्यवहार से बचें