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मशहूर लेखिका अर्चना त्यागी की कलम से…”कोचिंग का भ्रमजाल”

  • July 16, 2025
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Jagrat Times, Kanpur/ सपने देखना अच्छी बात है। उन्हें पूरे करने की कोशिश करना और भी अच्छी बात है। परंतु लक्ष्य को पहचानकर प्रयास करना हमें अवश्य ही

मशहूर लेखिका अर्चना त्यागी की कलम से…”कोचिंग का भ्रमजाल”

Jagrat Times, Kanpur/ सपने देखना अच्छी बात है। उन्हें पूरे करने की कोशिश करना और भी अच्छी बात है। परंतु लक्ष्य को पहचानकर प्रयास करना हमें अवश्य ही सफलता की सीढ़ी तक पहुंचा देता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग करना छात्रों की आवश्यकता बन चुका है। सही बात है, बिना उचित निर्देशन के मुकाम तक पहुंचना संभव भी नहीं है। फिर भी इस विषय पर लिखने की आवश्यकता हो गई है। कारण अच्छाई की छोटी बहन बुराई इतनी चतुर है कि चलती तो अच्छाई की उंगली पकड़कर है लेकिन धीरे धीरे अच्छाई के लिए सभी रास्ते बंद करके हर स्थान पर अपना कब्ज़ा जमा लेती है। कोचिंग के नाम पर ठगों का बाज़ार गर्म है। कितने माता पिता परेशान घूमते रहते हैं कि किसी नए कोचिंग में फीस जमा की। एक दो महीने पढ़ाई भी हुई उसके बाद बहानेबाजी शुरू। फिर पता चला कि कोचिंग वाला शहर छोड़कर चला गया है। ये तो सीधे सीधे ठगी का उदाहरण है।

इसके अलावा भी बहुत से छलावे हैं। कोचिंग की शुरुवात में विषय अध्यापक अलग होते हैं और कुछ दिनों बाद ही ऐसे अध्यापक आ जाते हैं जिन्हे स्वयं ही पढ़ने की जरूरत है। माता पिता विश्वास करके कोचिंग सेंटर जाते हैं कि उनके बच्चे को उचित कैरियर परामर्श मिलेगा परंतु होता तो उल्टा ही है। वह छात्र जो कक्षा में मुश्किल से पास होता है, कोचिंग वाले विश्वास दिला देते हैं कि वह आसानी से कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं को उत्तीर्ण कर लेगा। होता इसका उल्टा ही है। कुछ दिनों बाद ही बच्चे को महसूस हो जाता है कि उस परीक्षा को पास करना उसके बस का रोग नहीं है और वह कोचिंग छोड़ने का निर्णय ले लेता है। परिणाम पैसे और समय दोनों की बरबादी। कई छात्र तो इतना परेशान हो जाते हैं कि भविष्य में किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी नहीं करने की कसम तक खा लेते हैं।
आए दिन घर से दूर रहकर कोचिंग करने वाले छात्रों की अवसाद के कारण होने वाली मृत्यु की घटनाएं अखबार की सुर्खियों में छाई रहती है।
अब क्या किया जाए कि कोचिंग का लाभ भी मिल जाए और उसके कारण होने वाली समस्याओं से भी निजात मिल सके।
जागरूक अभिभावकों को ही होना पड़ेगा। बच्चे को ईश्वर ने जितनी क्षमताएं देकर पैदा किया है उनको निखारना ही उनकी जिम्मेदारी है। उस जिम्मेदारी का निर्वाह दूसरा कोई नहीं कर सकता है। अपने बच्चे से निरंतर संवाद बनाए रखें। बचपन से उनकी गतिविधियों पर निगाह रखें। अपने टूटे सपनों को उन पर थोपने से बचें। कोचिंग के भ्रमजाल में अनावश्यक रूप से न पड़ें। जिस भी कोचिंग में अपने बच्चे का दाखिला करवाने जा रहे हैं उसके बारे में पहले पूरी जानकारी प्राप्त करें। सबसे महत्वपूर्ण बात जब तक आवश्यकता नहीं जो इस जाल से बचे रहें । यदि कोई अनहित हो जाता है तो न केवल सजा दिलवाएं बल्कि दूसरे लोगों को भी उस अनहित के विषय में जानकारी अवश्य दें ताकि कुछ और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होने से बच जाए।

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