जोधपुर की सुप्रसिद्ध लेखिका अर्चना त्यागी की कलम से…आस्था ऊर्जा का स्रोत है…
- June 26, 2025
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Jagrat Times, Kanpur/ दीपोत्सव पर दिए जलाकर लक्ष्मी पूजा एक आस्था है, विश्वास है कि भगवान राम की ही तरह हम भी सभी बाधाओं को पार करते हुए
Jagrat Times, Kanpur/ दीपोत्सव पर दिए जलाकर लक्ष्मी पूजा एक आस्था है, विश्वास है कि भगवान राम की ही तरह हम भी सभी बाधाओं को पार करते हुए एक दिन विजयोत्सव मनाएंगे। हर त्यौहार किसी न किसी रूप में आस्था से जुड़ा हुआ है। त्यौहार हमारे जीवन में नवीनता लेकर आते हैं। मन को खुशी से तो भरते ही हैं, नई ऊर्जा का संचार भी करते हैं। एक दूसरे से समय समय पर मिलते रहने की पुनरावृत्ति भी करवाते हैं। कारण कोई भी हो, धर्म कोई भी हो सभी त्यौहार मानव की उन्नति, प्रगति और अध्यात्म को बढ़ाते हैं।

इस विषय पर आगे बढ़ने से पहले बता देना चाहती हूं कि इसका अर्थ धर्म विशेष में आस्था बिलकुल नहीं है। आस्था से यहां तात्पर्य उस विश्वास से है जो दुनिया को संचालित करने वाली शक्ति में किया जाता है। ख़ुद पर किया जाता है। उस विश्वास के साथ दुनिया में सब कुछ करना संभव है। जीवन में कोई भी परिस्थिति आए हम अपने कर्तव्य पथ से विमुख नहीं होते हैं। विद्यार्थियों को इसी विश्वास की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। विद्यार्थी जीवन बहुत सी चुनौतियों से भरा होता है। माता पिता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती, परीक्षा में अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होने की चुनौती, सही कैरियर चुनाव की चुनौती और कैरियर में सफलता प्राप्त करने की चुनौती। यही वह समय है जब सबसे अधिक विश्वास की आवश्यकता होती है। ख़ुद पर विश्वास की, आस्था की। यही विश्वास आस्था है। यह आस्था मन को दृढ़ता देती है। लक्ष्य को हासिल करने का रास्ता तय करती है। यह आस्था धर्म में भी हो सकती है क्योंकि धर्म का तात्पर्य भी कर्तव्य ही है।
विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य में आस्था रखनी चाहिए। अपनी तैयारी में आस्था रखनी चाहिए।
अब समस्या आती है कि यदि विश्वास रखने से भी सफलता नहीं मिले तो क्या किया जाए। किसको दोषी ठहराया जाए।
“असफलता केवल यह सिद्ध करती है कि सफलता का प्रयत्न पूरे मन से नहीं किया गया है।” एक कहावत भी है और सच्चाई भी है। यदि चूक जाएं तो घबराएं नहीं। फिर से उस आस्था को अपने भीतर जगाएं। जुट जाएं और तब तक अनवरत प्रयास जारी रखें जब तक कि आस्था कामयाबी की दास्तान नहीं लिख दे।
यह आस्था केवल सफल होने के लिए नहीं है बल्कि असफलता के क्षणों में भी ख़ुद को मजबूत बनाए रखने के लिए है। अपने प्रयासों पर विश्वास रखने के लिए है।
यही आस्था उस ऊर्जा का स्रोत भी है जो आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी है। हम जिस पर भी विश्वास करते हैं, पूरी तरह से करते हैं। यही विश्वास यदि ख़ुद पर हो जाए तो दुनिया को बदलने का प्रयास भी अधूरा नहीं रह जायेगा।
तो जीना है विश्वास के साथ। पाना है अपने लक्ष्य को और हटा देना है सभी बाधाओं को। आइए आस्था को अपनी आदत बनाते हैं। विश्वास के साथ आज से ही जीना शुरू करते हैं।
पांच दिन के त्यौहार दीपोत्सव को मनाने के साथ ही नव जीवन की शुरुवात करते हैं। आइए आगे बढ़ते हैं।