हिंदू धर्म में,माता का पांचवा स्वरुप स्कंदमाता
- April 3, 2025
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Jagrat Times, Kanpur/ हिंदू धर्म में,माता का पांचवा स्वरुप स्कंदमाता देवी को माना जाता है | स्कंदमाता की पूजा नवरात्रि की पंचमी तिथि पर की जाती है। स्कंदमाता
Jagrat Times, Kanpur/ हिंदू धर्म में,माता का पांचवा स्वरुप स्कंदमाता देवी को माना जाता है | स्कंदमाता की पूजा नवरात्रि की पंचमी तिथि पर की जाती है। स्कंदमाता
Jagrat Times, Kanpur/ हिंदू धर्म में,माता का पांचवा स्वरुप स्कंदमाता देवी को माना जाता है | स्कंदमाता की पूजा नवरात्रि की पंचमी तिथि पर की जाती है। स्कंदमाता की भक्तिभाव से पूजा-अर्चना करने व व्रत करने से जातक की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान कार्तिकेय की माता होने के कारण मां दुर्गा के इस स्वारूप को स्कंदमाता का नाम मिला |

Acharya Laxmi Kant Mishra
स्कंदमाता का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है, स्कंद व माता और इसका अर्थ होता है- स्कंद की माता. स्कंद का अर्थ भगवान कार्तिकेय और माता का अर्थ मां से है, इस प्रकार इनके नाम का अर्थ ही स्कंद की माता है. स्कंदमाता को पद्मासना भी कहा जाता है क्योंकि ये कमल पर विराजमान रहती हैं |
मां स्कंदमाता को गौरी, माहेश्वरी, पार्वती एवं उमा नाम से भी जाना जाता है।
• माता रानी की पूजा करने से संतान प्राप्ति की कामना पूरी होती है | पारिवारिक शांति बनी रहती है.
• माता रानी को सफेद रंग बेहद प्रिय है। बता दें सफेद रंग शुद्धता शांति और पवित्रता का प्रतीक है। इसलिए नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा करते समय सफेद रंग के कपड़े पहनने का विशेष महत्व है।
• मां स्कंदमाता को सफेद पीले रंग के फूल अत्यंत प्रिय है।
• स्कंदमाता को केले का भोग लगाना चाहिए |
मां स्कंदमाता की पूजा के मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥